देश के पांच क्षेत्रों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में विधानसभा चुनावों की मतगणना शुरू हो चुकी है। शुरुआती रुझानों पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।
दिग्गज नेताओं की साख दांव पर
इन चुनावों के नतीजे कई बड़े नेताओं के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। इनमें ममता बनर्जी, हिमंत बिस्वा सरमा, एम. के. स्टालिन और पिनराई विजयन प्रमुख हैं।
पश्चिम बंगाल में कांटे की टक्कर
पश्चिम बंगाल में शुरुआती रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी 15 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 10 सीटों पर आगे चल रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में मुकाबला बेहद कड़ा है और अंतिम नतीजों तक स्थिति बदल सकती है।
रिकॉर्ड मतदान और सुरक्षा इंतजाम
- इस बार पश्चिम बंगाल में लगभग 92.93% मतदान दर्ज किया गया, जो काफी उत्साहजनक रहा। हालांकि 294 में से 293 सीटों पर ही मतगणना हो रही है।
- दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और उसका परिणाम 24 मई को घोषित किया जाएगा।
- चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
मुख्य मुद्दे और रणनीति
- तृणमूल कांग्रेस ने ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं और मजबूत संगठन के दम पर चुनाव लड़ा है।
- वहीं भारतीय जनता पार्टी ने एंटी-इनकंबेंसी और प्रशासनिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
क्या कहते हैं रुझान?
एग्जिट पोल्स में भी पश्चिम बंगाल में करीबी मुकाबले के संकेत मिले थे। ऐसे में मामूली वोटों का अंतर ही सत्ता की तस्वीर तय कर सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि ममता बनर्जी सत्ता में वापसी करती हैं या भाजपा पहली बार बंगाल में सरकार बनाने में सफल होती है।