पिछले एक दशक में भारत में रसोई गैस के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से सरकार ने करोड़ों गरीब परिवारों तक एलपीजी कनेक्शन पहुंचाकर रसोई व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन किया है। पहले जहां देश के अनेक ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार लकड़ी, गोबर या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर थे, वहीं अब बड़ी संख्या में परिवार स्वच्छ ईंधन का उपयोग करने लगे हैं। इस पहल के परिणामस्वरूप देश में एलपीजी का कवरेज लगभग पचानवे प्रतिशत से अधिक घरों तक पहुंच चुका है, जो ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन के रूप में देखा जाता है।
आयात पर बढ़ती निर्भरता
हालांकि इस व्यापक विस्तार के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश में एलपीजी की कुल आवश्यकता की तुलना में घरेलू उत्पादन अभी भी काफी कम है। परिणामस्वरूप भारत को अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे एलपीजी उपयोग करने वाले परिवारों की संख्या बढ़ी है, वैसे-वैसे आयातित गैस पर निर्भरता भी बढ़ती गई है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले किसी भी संकट या आपूर्ति बाधा का असर सीधे देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य तनाव ने इस निर्भरता को एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने ला दिया है। क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ गया है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश को मिलने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता बढ़ती है तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों दोनों पर प्रभाव पड़ता है, जिससे घरेलू बाजार में भी चिंता का माहौल बन जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
पश्चिम एशिया का होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी क्षेत्र के अनेक देशों से निकलने वाले तेल और गैस के जहाज इसी मार्ग से होकर एशियाई देशों तक पहुंचते हैं। यदि इस मार्ग पर किसी भी कारण से यातायात प्रभावित होता है तो ऊर्जा आपूर्ति की श्रृंखला बाधित हो सकती है। हालिया तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही धीमी होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
एलपीजी क्रांति के सामाजिक लाभ
रसोई गैस के व्यापक उपयोग से देश में कई सकारात्मक परिवर्तन भी देखने को मिले हैं। घरों में धुएं और प्रदूषण में कमी आई है, जिससे महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पारंपरिक ईंधनों के कम उपयोग के कारण जंगलों से लकड़ी काटने की प्रवृत्ति में भी कमी आई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की जागरूकता भी बढ़ी है। इन सभी कारणों से एलपीजी विस्तार को सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
आपूर्ति श्रृंखला की नई चुनौतिया
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की बढ़ती मांग के साथ-साथ आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाना आवश्यक हो गया है। भारत खाड़ी क्षेत्र के कई देशों से एलपीजी आयात करता है और इन देशों से आने वाले जहाज प्रमुख समुद्री मार्गों के माध्यम से ही देश तक पहुंचते हैं। यदि इन मार्गों पर तनाव या बाधा उत्पन्न होती है तो आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आयात स्रोतों का विस्तार और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास करना आवश्यक माना जा रहा है।
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