कोलकाता: कोलकाता हाईकोर्ट परिसर गुरुवार को उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वोट के बाद हुई हिंसा (Post-poll violence) के मामले में बहस करने अदालत पहुंचीं। ममता बनर्जी ने खुद वकील की पोशाक पहनकर कोर्ट में पैरवी की, लेकिन कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही उन्हें भारी विरोध और नारेबाजी का सामना करना पड़ा।
कोर्ट रूम के बाहर 'चोर-चोर' के नारे
सुनवाई खत्म होने के बाद जैसे ही ममता बनर्जी कोर्ट रूम नंबर 1 से बाहर निकलीं, वकीलों के एक समूह ने उन्हें देखकर 'चोर, चोर' चिल्लाना शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और तृणमूल लीगल सेल के सदस्यों को ममता बनर्जी को सुरक्षित उनकी कार तक पहुँचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसी दौरान कोर्ट के गलियारों में एक तरफ 'जय श्री राम' और दूसरी तरफ से 'जय बांग्ला' के नारे लगे। हंगामे से नाराज होकर मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने सुनवाई के बीच में ही एजलास छोड़ दिया।
ममता बनर्जी की अदालत में दलील
अदालत में पैरवी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "मैं 1985 से वकील हूं। राज्य में अब तक 10 लोगों की हत्या हो चुकी है। नवविवाहित जोड़ों पर हमले हो रहे हैं। यहां तक कि मेरे घर के सामने भी सुबह से शाम तक हंगामा किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा का संकट पैदा हो गया है। यह बुलडोजर का राज्य नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक राज्य है, कृपया इसकी रक्षा करें।"
कोर्ट में चली तीखी बहस
कल्याण बनर्जी (TMC वकील): उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद हिंसा बढ़ गई है और पिछली पांच जजों की बेंच के फैसले के अनुसार कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
विकास रंजन भट्टाचार्य (CPIM वकील): उन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस मामले को पांच जजों की बेंच के साथ जोड़ने की मांग की।
डीएसजी धीरज त्रिवेदी: केंद्र सरकार की ओर से दलील देते हुए उन्होंने आरोपों की सत्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2000 जगहों पर हिंसा का दावा बिना किसी ठोस पुलिस रिपोर्ट या रेफरेंस के किया गया है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी की और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।