दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह पिछले 11 दिनों से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में थे। यह एक मौन, एकांत और आत्म-अवलोकन का समय था, जहां उन्होंने अपने फोन को भी बंद रखा था और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए थे।
विपश्यना ध्यान शिविर में अनुभव
सिसोदिया ने बताया कि विपश्यना ध्यान शिविर में उन्हें 12 घंटे से अधिक समय तक अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा, जिससे उन्हें अपने मन और शरीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि यह अनुभव न केवल चित्त की शांति का मार्ग है, बल्कि स्वयं को जानने का एक दुर्लभ अवसर भी है।
शिक्षा के मानवीयकरण पर जोर
सिसोदिया ने बताया कि विपश्यना ध्यान शिविर में उन्हें यह एहसास हुआ कि शिक्षा के मानवीयकरण पर जोर देना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने हैप्पीनेस पाठ्यक्रम शुरू किया था, जो शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प है कि देश के हर बच्चे को शानदार शिक्षा मिले, जो न केवल उन्हें सफल बनाए, बल्कि एक बेहतर इंसान भी बनाए।
विपश्यना ध्यान शिविर के बाद का अनुभव
सिसोदिया ने बताया कि विपश्यना ध्यान शिविर के बाद उन्हें एक नई ऊर्जा और जोश का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने काम के प्रति और भी अधिक समर्पित होंगे और देश के हर बच्चे को शानदार शिक्षा दिलाने के लिए काम करेंगे।
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