कोलकाता: मतुआ मेला इस साल ठाकुरनगर में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित हुआ। मतुआ समुदाय के इस सबसे बड़े वार्षिक आयोजन में राज्यभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। यह मेला श्री श्री हरिचंद ठाकुर की जयंती के अवसर पर हर साल आयोजित किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं। स्थानीय स्तर पर इसे मतुआ धर्म महामेला भी कहा जाता है।
रेलवे की खास तैयारी
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पूर्व रेलवे के सियालदह मंडल ने 33 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। इनमें मेल/एक्सप्रेस और ईएमयू ट्रेनें शामिल रहीं। इन ट्रेनों के जरिए करीब 60 हजार श्रद्धालु ठाकुरनगर पहुंचे। स्टेशनों पर अतिरिक्त टिकट काउंटर, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग सुविधा और बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था की गई।
सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट मोड में
मेले के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल बूथ बनाए गए और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। यात्रियों की सहायता के लिए आधुनिक सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया।
श्रद्धालुओं का क्या कहना है
मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रशासन और रेलवे की व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने कहा कि इस बार यात्रा पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक रही। भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
आस्था के साथ संगठन का भी प्रदर्शन
मतुआ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समुदाय की एकजुटता और संगठन का भी बड़ा उदाहरण है। हर साल इस मेले में लाखों लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि मतुआ समाज अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को लेकर कितना जागरूक है।
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