नई दिल्ली में संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर पहली बार विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात चिंताजनक हैं और इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि भारत शांति का पक्षधर है और सभी देशों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
बातचीत से ही निकलेगा समाधान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिक इलाकों, पावर प्लांट और कमर्शियल जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारत लगातार सभी पक्षों से संपर्क में है और तनाव कम करने की अपील कर रहा है ताकि हालात सामान्य हो सकें।
होर्मुज मार्ग पर चिंता, सप्लाई चेन पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि यह मार्ग भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, इसलिए भारत इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
तेल-गैस संकट से बचने के लिए बड़ी रणनीति
सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने अपने आयात स्रोतों को बढ़ाते हुए 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है। साथ ही अलग-अलग सप्लायर्स से लगातार संपर्क रखा जा रहा है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो और सप्लाई सुचारू बनी रहे।
रणनीतिक भंडारण और निरंतर निगरानी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में कच्चे तेल के भंडारण पर विशेष ध्यान दिया है। वर्तमान में 65 लाख मीट्रिक टन के रणनीतिक रिजर्व की दिशा में काम जारी है। इसके अलावा सरकार एक विशेष ग्रुप के जरिए रोजाना आयात-निर्यात और सप्लाई की स्थिति की समीक्षा कर रही है।
भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। पीएम नरेद्र मोदी ने बताया कि इस क्षेत्र में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं। अब तक 3 लाख 75 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिनमें ईरान से लौटे नागरिक भी शामिल हैं।
बिजली और ऊर्जा सेक्टर पर फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ेगी। इसे देखते हुए पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक रखा गया है और उत्पादन से लेकर सप्लाई तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि देश में बिजली संकट न हो।
खाद्य सुरक्षा और किसानों के लिए तैयारी
सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी भरोसा दिलाया है। देश में पर्याप्त अन्न भंडार मौजूद है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी है। किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है और नैनो यूरिया व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भारत
भारत ने इस संकट को लेकर वैश्विक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है। भारत की कोशिश है कि यह तनाव जल्द खत्म हो और क्षेत्र में स्थिरता लौटे।
एकजुटता का संदेश
प्रधानमंत्री ने संसद से अपील की कि इस मुद्दे पर देश को एकजुट होकर दुनिया के सामने मजबूत संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में सोचने का है, ताकि भारत इस वैश्विक संकट का मजबूती से सामना कर सके।