नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे निम्न दबाव के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इसके चलते देश के बड़े हिस्से में मानसूनी बादलों की सक्रियता बढ़ रही है और वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण तापमान और उमस लगातार बढ़ रही थी, लेकिन अब मौसम में बदलाव के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में व्यापक वर्षा का कारण बन सकती है, जिससे किसानों और आम लोगों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
उत्तर से मध्य भारत तक 15 राज्यों में बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित करीब 15 राज्यों में व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना व्यक्त की गई है। वहीं दक्षिण भारत के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में भी अगले 24 घंटों के दौरान वर्षा की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी प्रणाली की संयुक्त सक्रियता से यह बदलाव देखने को मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बरसे मेघ
शनिवार सुबह से ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी सहित अनेक शहरों में वर्षा होने से तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए वर्षा संबंधी अलर्ट जारी किया गया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी कई स्थानों पर लगातार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में इन राज्यों में वर्षा की तीव्रता और बढ़ सकती है, जिससे जलाशयों में जलस्तर बढ़ने और खरीफ फसलों को लाभ मिलने की संभावना है।
पहाड़ी राज्यों में भारी वर्षा के साथ सतर्कता की जरूरत
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में लगातार वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़ और कुछ संवेदनशील इलाकों में बादल फटने जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई है। हवा में बढ़ी नमी और चक्रवातीय परिसंचरण के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने तथा मौसम संबंधी आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की है ताकि किसी भी संभावित आपदा से बचा जा सके।
दिल्ली-एनसीआर समेत मैदानी इलाकों को मिलेगी उमस से राहत
दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से उमस भरी गर्मी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 18 से 19 जुलाई के बीच इन इलाकों में भी अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस से राहत मिलेगी। हालांकि वर्षा से पहले कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कृषि, जल संसाधन और जनजीवन के लिए राहत भरी खबर
मानसून की दोबारा सक्रियता को कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समय पर होने वाली वर्षा से खरीफ फसलों की बुआई और बढ़वार को गति मिलेगी, जबकि जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर में भी सुधार की संभावना है। दूसरी ओर, जिन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा का अनुमान है, वहां जलभराव, यातायात बाधित होने और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का यह सक्रिय दौर एक ओर जहां गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और नागरिकों को मौसम संबंधी चेतावनियों के प्रति सतर्क रहना भी आवश्यक होगा।