नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम आकलन के अनुसार मध्य भारत तथा उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों पर सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और चक्रवाती हवाओं का प्रभाव बना हुआ है। मॉनसून ट्रफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिम राज्यों से होते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तक फैली हुई है तथा बंगाल की खाड़ी से जुड़ रही है। इस सक्रिय ट्रफ के कारण मॉनसून की सामान्य वापसी की प्रक्रिया रुक गई है और अगले तीन से चार दिनों तक कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसमी बदलाव किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है क्योंकि अंतिम चरण में हुई बारिश मिट्टी की नमी बढ़ाने में मदद करेगी। साथ ही यह स्थिति सामान्य मौसमी चक्र से कुछ अलग दिखाई दे रही है जिससे आगामी दिनों में मौसम की अनिश्चितता बनी रह सकती है।
गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी
गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भारी बारिश और अचानक बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने कच्छ, मोरबी, जामनगर, द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ और राजकोट जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान तथा कच्छ क्षेत्र के पास बने कम दबाव वाले क्षेत्र से सौराष्ट्र और कच्छ में कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। उन्नीस सितंबर के आसपास पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए हालात अनुकूल होने लगे हैं लेकिन फिलहाल सक्रिय ट्रफ के कारण बारिश का दौर जारी रहेगा। कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग में भी कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में हल्की बारिश के आसार
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सोलह और सत्रह सितंबर को हल्के बादल छाए रहने तथा हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना व्यक्त की गई है। अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल बने रह सकते हैं लेकिन मॉनसून की धीरे-धीरे वापसी के कारण अब इन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना बहुत कम है। उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून ट्रफ के सक्रिय रहने से उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मौसम शुष्क होने में देरी हो रही है। इससे तापमान में भी सामान्य से कुछ गिरावट महसूस की जा सकती है तथा आद्रता का स्तर ऊंचा बना रहेगा। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखें।
उत्तराखंड और पहाड़ी राज्यों में अलर्ट जारी
उत्तराखंड में अड़तालीस से बहत्तर घंटों के दौरान गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इन पहाड़ी क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में भारी वर्षा से चारधाम यात्रा प्रभावित हो सकती है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत दी गई है क्योंकि फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।
पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव और आम लोगों के लिए सावधानियां
उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर बने कम दबाव क्षेत्र तथा चक्रवाती हवाओं के संयुक्त प्रभाव से अगले तीन से चार दिनों तक कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और अधिक सक्रिय हो सकता है। मौसम विभाग ने सभी संबंधित राज्यों के प्रशासन को सतर्क रहने तथा आवश्यक तैयारियां रखने की सलाह दी है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करें तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें। आम नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें तथा अनावश्यक यात्राओं से बचें। मॉनसून ट्रफ की यह सक्रियता सामान्य वापसी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है लेकिन दीर्घकाल में यह मिट्टी की नमी बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो सकती है।