मुंबई के वर्ली इलाके में पिछले सप्ताह हुए राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान एक महिला द्वारा भाजपा विधायक गिरिश महाजन से तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। अब महिला टीना चौधरी ने वीडियो संदेश जारी कर बताया है कि वह अपनी बेटी को संगीत कक्षा से लेने जा रही थीं, लेकिन लंबे समय तक सड़क पर फंसे रहने के कारण उनका धैर्य टूट गया।
“हर पुलिसकर्मी से मदद मांगी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई”
टीना चौधरी ने कहा कि उन्होंने मौके पर मौजूद कई पुलिसकर्मियों से रास्ता खुलवाने और सहायता की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। उनके अनुसार लगातार बढ़ते जाम और लोगों की परेशानी देखकर वह बेहद परेशान हो गई थीं। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा विधायक गिरिश महाजन ही ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने कम से कम उनकी बात सुनने की कोशिश की।
महिला आरक्षण मुद्दे पर निकाली जा रही थी रैली
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब भाजपा विधायक गिरिश महाजन महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन रैली का नेतृत्व कर रहे थे। प्रदर्शन के कारण वर्ली क्षेत्र में यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया था। वायरल वीडियो में टीना चौधरी विधायक से कहती नजर आई थीं कि ऐसी रैली खुले मैदान में आयोजित की जा सकती थी, आम जनता को परेशान करने की क्या जरूरत थी।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने महिला की नाराजगी को जायज बताया और कहा कि आम नागरिकों को राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण घंटों परेशान होना पड़ता है। वहीं कुछ लोगों ने सार्वजनिक मंच पर इस तरह के विरोध को लेकर भी सवाल उठाए। वीडियो ने देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी।
शहरी ट्रैफिक प्रबंधन पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद महानगरों में राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर फिर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन को वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पहले से तैयार रखनी चाहिए ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मुंबई जैसे महानगर में कुछ घंटों का जाम भी हजारों लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।
आम नागरिकों की परेशानी बनी बड़ी चिंता
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आम नागरिकों का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत प्रदर्शन जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इससे आम लोगों की आवाजाही और जरूरी काम प्रभावित नहीं होने चाहिए। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।