पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले मुर्शिदाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नवाब मीर जाफर के वंशजों ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार के 100 से अधिक सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके मतदान अधिकार और नागरिकता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
नवाब परिवार के सैकड़ों नाम सूची से गायब
कभी बंगाल की सत्ता का केंद्र रहा मुर्शिदाबाद आज एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां का नवाब परिवार, जो पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहा है, अब अपनी पहचान और मतदाता अधिकार साबित करने की स्थिति में आ गया है। आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान परिवार के बड़ी संख्या में सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।
“हमने पहले वोट दिया, अब नाम ही नहीं” — फहीम मिर्जा
लालबाग स्थित किला निजामत में रहने वाले सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा—जो मीर जाफर के 16वीं पीढ़ी के वंशज और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्षद हैं—ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, “हमने 2002 में वोट डाला था, लेकिन अब अचानक हमारे नाम सूची से गायब हो गए हैं।”
एक बूथ से 286 नाम हटने का दावा
जानकारी के अनुसार, लालबाग के बूथ नंबर 121 पर करीब 850 मतदाताओं में से 286 नाम हटा दिए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या नवाब परिवार के सदस्यों की बताई जा रही है। हटाए गए नामों में फहीम मिर्जा, उनके पिता, पत्नी और अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं।
दस्तावेज देने के बावजूद नहीं मिला समाधान
नवाब परिवार का कहना है कि उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए। यहां तक कि परिवार के बुजुर्ग सदस्य भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम सूची में बहाल नहीं किए गए।
इतिहास से जुड़ा नवाब परिवार का दावा
मुर्शिदाबाद का नवाब परिवार बंगाल के इतिहास का अहम हिस्सा रहा है। 1757 के प्लासी युद्ध के बाद मीर जाफर को नवाब बनाया गया था। परिवार का कहना है कि उनके पूर्वज सैयद वासिफ अली मिर्जा ने विभाजन के समय भारत में ही रहने का फैसला किया था, जबकि उन्हें पाकिस्तान जाने का विकल्प दिया गया था। परिवार के सदस्य यह भी बताते हैं कि आजादी के बाद कुछ समय के लिए मुर्शिदाबाद पाकिस्तान का हिस्सा बना था, लेकिन बाद में इसे भारत में शामिल कर लिया गया।
राजनीति में भी गूंजा मामला
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक गौरिशंकर घोष ने कहा कि बिना कारण किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाता। उन्होंने प्रभावित लोगों को फॉर्म-6 के जरिए दोबारा आवेदन करने की सलाह दी है। वहीं, नवाब परिवार इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और उनका कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव खत्म हो सकता है।
ट्राइब्यूनल का रास्ता, लेकिन समय की चुनौती
नवाब परिवार के सदस्य अब ट्राइब्यूनल का रुख करने की तैयारी में हैं। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत वैध मतदाताओं को पहले “विवादित” सूची में डालकर बाद में हटाया जा रहा है। अब इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है - क्या सदियों से एक ही जगह रह रहे लोगों को भी अपनी नागरिकता और मतदान का अधिकार साबित करना पड़ेगा?