वाशिंगटन. नासा का स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी टेलीस्कोप अंतरिक्ष में अपनी निर्धारित कक्षा से निरंतर नीचे की ओर खिसक रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुमान के अनुसार यह 6 नवंबर के आसपास धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। करीब डेढ़ टन वजन वाले इस टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि कुछ भारी हिस्से बचकर धरती तक पहुंचने की आशंका बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में सूर्य की तीव्र गतिविधियों के कारण वायुमंडल के ऊपरी हिस्से के फैलने से इसकी ऊंचाई तेजी से घटी है।
संभावित गिरने का समय और प्रभावित क्षेत्र
अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार टेलीस्कोप 6 नवंबर के आसपास वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इसके धरती पर लौटने का संभावित क्षेत्र काफी व्यापक है जिसमें अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य और दक्षिण अमेरिका के हिस्से शामिल हैं। नासा के वैज्ञानिक ब्रैड सेंको के अनुसार अधिकांश अवशेष समुद्र में गिरने की संभावना अधिक है। फिर भी स्थल भागों पर गिरने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अमेरिकी स्पेस फोर्स इसकी कक्षा और दिशा पर लगातार निगरानी रख रही है।
बचाव अभियान की पूर्ण नाकामी
नासा ने स्विफ्ट को अंतरिक्ष में बनाए रखने के लिए करीब एक वर्ष पहले कैटलिस्ट स्पेस कंपनी को बचाव अभियान सौंपा था। कंपनी ने जुलाई में लिंक नामक तीन भुजाओं वाला रोबोट अंतरिक्ष में भेजा जिसका उद्देश्य टेलीस्कोप तक पहुंचकर उसकी कक्षा ऊंची करना था। लेकिन रोबोट टेलीस्कोप से मात्र 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तक ही पहुंच पाया और सितंबर में स्वयं धरती पर लौट आया। अभियान पूरी तरह विफल रहा जिसके बाद नासा ने अक्टूबर के अंत में टेलीस्कोप के सभी तंत्र बंद कर दिए।
टेलीस्कोप के अवशेषों से संभावित खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में जल जाएगा लेकिन टंगस्टन से बने कुछ हिस्से और दर्पण के टुकड़े बचकर धरती तक पहुंच सकते हैं। ये हिस्से सीसे से भी अधिक घनत्व वाले हैं इसलिए पूरी तरह नष्ट नहीं होंगे। हालांकि समुद्र में गिरने की आशंका अधिक बताई जा रही है फिर भी स्थलीय क्षेत्रों पर प्रभाव की संभावना बनी हुई है। भारत सहित कई देशों को इस संभावित क्षेत्र में रखा गया है इसलिए निगरानी जारी है।
22 वर्षों की अद्वितीय वैज्ञानिक उपलब्धियां
स्विफ्ट टेलीस्कोप को 20 नवंबर 2004 को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य गामा किरण विस्फोटों और सुपरनोवा जैसी शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करना था। अपने 22 वर्षों के अभियान में इसने 2,000 से अधिक गामा किरण विस्फोटों और करीब 1,400 तारों के विस्फोटों का पता लगाया। यह किसी असाधारण घटना का संकेत मिलते ही तेजी से दिशा बदलकर हबल और जेम्स वेब जैसी दूरबीनों को सूचना देता था। ब्रह्मांड के हजारों रहस्यों से पर्दा उठाने में इसकी भूमिका अमूल्य रही।
भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों पर प्रभाव
वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि एक दिन स्विफ्ट का सफर समाप्त होगा। पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलविद जॉन नॉसेक ने कहा कि इस मिशन से मिली सीख भविष्य के अभियानों में ब्रह्मांड की नई खोजों को तेज करने में मदद करेगी। अब वैज्ञानिक इसके विकल्प और भविष्य के मिशनों में इस कमी को पूरा करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। स्विफ्ट की विदाई अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक युग के अंत के समान है लेकिन इससे मिली जानकारियां आगे के अध्ययनों का आधार बनेंगी।