पैन से जुड़े नियम लंबे समय से बरकरार थे, लेकिन बदलते आर्थिक ढांचे और बढ़ते डिजिटल भुगतान ने इन्हें अद्यतन बनाने की आवश्यकता पैदा की। सरकार का लक्ष्य है कि छोटे नकद लेनदेन करने वालों को अनावश्यक झंझट से मुक्त किया जाए, जबकि बड़े वित्तीय सौदों की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। नए प्रस्तावित नियम इसी दिशा में कदम माने जा रहे हैं और इन्हें आगामी अप्रैल से लागू करने पर विचार हो रहा है।
नकद लेनदेन के लिए नई सालाना सीमा
पहले एक ही दिन में पचास हजार से अधिक नकद जमा या निकासी पर पैन देना आवश्यक था, जिससे छोटे कारोबारियों और साधारण खाताधारकों को कई बार असुविधा होती थी। नई व्यवस्था में अब पूरे वर्ष का हिसाब जोड़ा जाएगा। यदि किसी वित्तीय वर्ष में नकद लेनदेन दस लाख या उससे अधिक हो जाए, तभी पैन देना अनिवार्य होगा। इससे छोटे कारोबारियों, ग्रामीण क्षेत्र के खाताधारकों और सामान्य ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब हर बार अलग-अलग तिथि पर सीमा पार होने की चिंता नहीं रहेगी।
वाहन खरीद पर बढ़ी छूट
नई व्यवस्था में वाहन खरीदने पर भी पैन की अनिवार्यता की सीमा संशोधित की गई है। अब केवल पाँच लाख से अधिक मूल्य वाले वाहनों के लिए ही पैन देना आवश्यक होगा। दोपहिया वाहनों पर भी यही व्यवस्था लागू होगी। इससे कम कीमत वाले वाहन खरीदने वालों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और खरीद प्रक्रिया सरल होगी।
होटल और आयोजनों के बिल पर नई व्यवस्था
भोजनालय, विश्रामगृह और बड़े आयोजनों के बिल पर पहले पचास हजार से अधिक खर्च होने पर पैन देना आवश्यक था। संशोधन के बाद यह सीमा बढ़ाकर एक लाख कर दी गई है। इससे परिवारों, यात्रियों और सामान्य उपभोक्ताओं को सुविधा होगी, क्योंकि अब छोटे-छोटे भोज या आयोजनों पर पहचान विवरण देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
संपत्ति और बीमा से जुड़े प्रावधान
संपत्ति खरीद-बिक्री से संबंधित सौदों में पैन की अनिवार्यता की सीमा दस लाख से बढ़ाकर बीस लाख कर दी गई है। इससे मध्यम वर्ग की संपत्ति खरीद प्रक्रिया सरल होगी। दूसरी ओर, हर नई बीमा पॉलिसी पर पैन देना अनिवार्य किया गया है, जिससे बीमा लेनदेन की पारदर्शिता और सत्यापन को मजबूत किया जा सकेगा।
किन लोगों को होगा लाभ
नियमों में यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहत लेकर आएगा जो डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देते हैं और नियमित वेतनभोगी वर्ग से आते हैं। छोटे कारोबार करने वाले और कम नकद लेनदेन वाले नागरिक भी इससे लाभान्वित होंगे। दूसरी ओर, बड़े नकद सौदों, संपत्ति के बड़े लेनदेन और बड़ी बीमा योजनाओं से जुड़े लोगों पर निगरानी और अधिक प्रभावी होगी।
किन बातों का रखें ध्यान
नई व्यवस्था में लाभ लेने के लिए नागरिकों को अपने पैन की सक्रियता अवश्य जांचनी चाहिए। पैन और आधार का जोड़ अनिवार्य है, अतः दोनों को समय रहते जोड़ना आवश्यक है। बड़े खर्चों की पूर्व तैयारी करते समय नई सीमाओं का ध्यान रखना होगा। नकद पर निर्भरता कम कर डिजिटल माध्यम अपनाने से न केवल सुविधा बढ़ेगी बल्कि रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रहेंगे।
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