नई दिल्ली. भारत में बेरोजगारी दर सालाना आधार पर सितंबर में 0.2 प्रतिशत घटकर 5 प्रतिशत हो गई है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों में दी गई। देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में पांच प्रतिशत पर स्थिर रही। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानी पीएलएफएस के अनुसार अगस्त 2026 की तुलना में सितंबर में बेरोजगारी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। बेरोजगारी दर सितंबर 2025 में 5.2 प्रतिशत थी। ये आंकड़े श्रम बाजार में स्थिरता और कुछ क्षेत्रों में सुधार के संकेत देते हैं। सरकार ने इन आंकड़ों को सकारात्मक विकास के रूप में प्रस्तुत किया है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्थिति
एनएसओ के मुताबिक इस दौरान ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 0.4 प्रतिशत कम होकर 4.2 प्रतिशत रह गई है। पिछले साल समान अवधि में यह 4.6 प्रतिशत पर थी। वहीं शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर पिछले वर्ष के समान ही सितंबर में करीब 6.8 प्रतिशत पर स्थिर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में गिरावट रोजगार अवसरों में सुधार का संकेत देती है जबकि शहरी क्षेत्रों में स्थिरता बनी हुई है। दोनों क्षेत्रों के आंकड़े अलग-अलग प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और allied गतिविधियों के प्रभाव को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है। शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की भूमिका महत्त्वपूर्ण बनी हुई है।
श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि
सितंबर में श्रम बल भागीदारी दर यानी एलएफपीआर 0.2 प्रतिशत बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई है। यह पिछले साल की समान अवधि में 55.3 प्रतिशत पर थी। इस दौरान ग्रामीण एलएफपीआर 0.6 प्रतिशत बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई है जो पहले 57.4 प्रतिशत थी। वहीं शहरी एलएफपीआर सालाना आधार पर 0.2 प्रतिशत कम होकर 50.7 प्रतिशत हो गई है जो पहले 50.9 प्रतिशत थी। हालांकि शहरी एलएफपीआर में सितंबर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत का सुधार देखा गया। ये आंकड़े श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
महिला श्रम बल भागीदारी में सुधार
सितंबर 2026 में कुल महिला एलएफपीआर 34.6 प्रतिशत रहा जबकि अगस्त 2026 में यह 34.8 प्रतिशत था। शहरी महिला एलएफपीआर में महीने-दर-महीने के आधार पर 0.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 25.9 प्रतिशत हो गया जो अक्टूबर 2025 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। कुल महिला एलएफपीआर में सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई और यह सितंबर 2025 के 34.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 34.6 प्रतिशत हो गया। ग्रामीण महिला एलएफपीआर में 1.0 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई और यह 37.9 प्रतिशत से बढ़कर 38.9 प्रतिशत हो गया। महिला भागीदारी में यह सुधार सकारात्मक संकेत है।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात की स्थिति
सितंबर में कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात यानी डब्ल्यूपीआर 52.7 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रहा। शहरी डब्ल्यूपीआर अक्टूबर 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर 47.2 प्रतिशत पर पहुंच गया। यह सुधार दोनों लिंगों में देखने को मिला। शहरी पुरुषों का डब्ल्यूपीआर 70.7 प्रतिशत से बढ़कर 71.0 प्रतिशत हो गया और शहरी महिलाओं का डब्ल्यूपीआर 23.2 प्रतिशत से बढ़कर 23.5 प्रतिशत हो गया। कुल डब्ल्यूपीआर सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई और यह सितंबर 2025 के 52.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 52.7 प्रतिशत हो गया। ये आंकड़े रोजगार सृजन की दिशा में स्थिर प्रगति को दर्शाते हैं।
आंकड़ों का समग्र विश्लेषण
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट के साथ श्रम बल भागीदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है जबकि शहरी क्षेत्रों में स्थिरता बनी हुई है। महिला श्रम बल भागीदारी में सालाना वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ये रुझान अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसरों के विस्तार और श्रम बाजार की सक्रियता को इंगित करते हैं। सरकार इन आंकड़ों को नीतिगत सफलता के रूप में देख रही है। आगे के महीनों में इन प्रवृत्तियों पर नजर रखना महत्त्वपूर्ण होगा।
रोजगार परिदृश्य पर प्रभाव
बेरोजगारी दर का 5 प्रतिशत पर स्थिर रहना और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरावट श्रम बाजार के लिए राहत भरा संकेत है। श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि अधिक लोगों के कार्यबल में शामिल होने को दर्शाती है। महिला भागीदारी में सुधार सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम है। शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर का उच्च स्तर रोजगार की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार का संकेत देता है। कुल मिलाकर ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की रोजगार सृजन क्षमता को रेखांकित करते हैं। नीति निर्माताओं के लिए ये आंकड़े आगे की रणनीति बनाने में सहायक होंगे।