हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थापित देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। कश्मीर के बाद यह वह स्थान है, जहां ट्यूलिप की मनमोहक घाटी पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। इसे सीएसआईआर के हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा विकसित किया गया है और विशेष बात यह है कि यह भारत का पहला ऐसा ट्यूलिप गार्डन है, जिसकी पौध पूरी तरह स्वदेशी रूप से तैयार की गई है। लाहौल-स्पीति की जलवायु में वर्षों के शोध के बाद ये पौधे विकसित किए गए हैं, जो अब पालमपुर की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं।
स्वदेशी पौध से विकसित हुआ अनोखा गार्डन
सी.एस.आई.आर-आईएचबीटी संस्थान ने इस वर्ष करीब 50,000 ट्यूलिप पौधे लगाए हैं, जिनमें छह किस्मों के फूल शामिल हैं। यह ट्यूलिप गार्डन खुलते ही हजारों की संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। संस्थान के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग साढ़े चार लाख लोग यहां पहुंचे थे और इस वर्ष भी पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कश्मीर के समान खूबसूरत नज़ारा अब हिमाचल में उपलब्ध होने से पर्यटकों को लंबी यात्रा तय करने की आवश्यकता भी कम हो रही है।
देश में पहली बार पूरी तरह घरेलू ट्यूलिप पौध तैयार
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव बताते हैं कि पहले ट्यूलिप पौध का आयात विदेशों से करना पड़ता था, जो जलवायु की असंगति के कारण कई बार सफल नहीं हो पाता था। लेकिन पिछले पाँच वर्षों में लाहौल-स्पीति की जलवायु में ट्यूलिप को तैयार करने पर किए गए शोध ने अद्भुत सफलता दिलाई है। यह उपलब्धि भारत को ट्यूलिप के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, ट्यूलिप की बढ़ती मांग को देखते हुए किसान यदि इसे अपने खेतों में उगाएं तो उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
फूलों की खेती को बढ़ावा देने की बड़ी योजना
संस्थान का लक्ष्य आगामी पाँच वर्षों में हिमाचल में 23 लाख ट्यूलिप पौध तैयार करने का है। यह प्रयास घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। हिमाचल की जलवायु फूलोत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि जब देश के मैदानी क्षेत्रों में फूल उगाना कठिन हो जाता है, तब भी हिमाचल में फूलों की सफल पैदावार संभव रहती है। यही कारण है कि ट्यूलिप उत्पादन के इस मॉडल को देशभर में अपनाने की संभावनाएं काफी व्यापक हैं।
फूलों के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नया बल
पालमपुर का यह नया ट्यूलिप गार्डन न केवल पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गया है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिकी को भी नई ऊर्जा देने वाला है। बढ़ते पर्यटन, फूलों की मांग और स्वदेशी पौध उत्पादन के मेल से यह प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश को फूलोत्पादन के राष्ट्रीय मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिला रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ वैज्ञानिक नवाचार का संगम इस गार्डन को भारत के फुल-टूरिज्म सेक्टर में एक नई पहचान दे रहा है।
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