विशाखापत्तनम में होने वाला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू इस बार भारत की नौसैनिक शक्ति का सबसे भव्य प्रदर्शन बनने जा रहा है, जहां पहली बार INS विक्रांत अपनी पूर्ण सामरिक क्षमता के साथ दुनिया के सामने दिखाई देगा।
भारतीय समुद्री प्रभुत्व का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन
विशाखापत्तनम में 18 फरवरी से शुरू होने जा रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन नौसैनिक अभ्यास के जरिए भारत दुनिया के सामने अपनी समुद्री ताकत का अभूतपूर्व प्रदर्शन करने जा रहा है। इस आयोजन में 75 देशों की 65 नौसेनाएं शामिल हो रही हैं, जिससे भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक प्रभाव को और अधिक सुदृढ़ करता दिखेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर के रूप में इस दिन समुद्र में मौजूद 60 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों की भव्य समीक्षा करेंगी, जो भारतीय नौसेना की बढ़ती शक्ति का विशेष प्रमाण होगा।
INS विक्रांत: भारत की आत्मनिर्भरता की मिसाल
इस बार के फ्लीट रिव्यू का सबसे बड़ा आकर्षण भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत है, जो पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का हिस्सा बन रहा है। यह क्षण न केवल भारतीय नौसेना के विकास, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। INS विक्रांत पूर्ण लाव-लश्कर के साथ कैरियर बैटल ग्रुप में प्रदर्शित किया जाएगा। किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर की तरह यह भी अकेले ऑपरेट नहीं करता, बल्कि कई डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, कॉर्वेट और कई बार पनडुब्बियां भी इसके साथ रहती हैं, जो इसे एक अजेय स्ट्राइक फोर्स का रूप देती हैं।
पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर विक्रांत की गर्जना
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में INS विक्रांत की पहली प्रस्तुति भारतीय समुद्री शक्ति की ऐतिहासिक उपलब्धि है। दुनिया में केवल कुछ ही नौसेनाओं के पास एयरक्राफ्ट कैरियर संचालित करने की क्षमता है और वे भी कैरियर बैटल ग्रुप के साथ ही कार्य करते हैं। विक्रांत 45 हजार टन वजनी है, इसकी लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर है। यह 18 मंजिला ऊंचा होता है और लगभग 52 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से समुद्र पर दौड़ सकता है। इसमें 1600 से अधिक नौसैनिक तैनात रह सकते हैं, वहीं एक साथ लगभग 30 एयरक्राफ्ट ऑपरेट हो सकते हैं, जिनमें मिग-29K, एमएच-60आर, कामोव-31, चेतक, रोमियो और ALH ध्रुव जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
भारत का बढ़ता समुद्री रणनीतिक प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति मजबूत की है। चाहे यमन के पास जहाजों की सुरक्षा का मामला हो या समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी, भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं का प्रभावी परिचय देती रही है। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और एक्सरसाइज मिलन 2026 में इसकी भागीदारी इस बढ़ते प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है, साथ ही यह इस क्षेत्र में भारत को स्थिरता और सुरक्षा का स्तंभ साबित करती है।
एक्सरसाइज मिलन 2026: समुद्री सहयोग का नया अध्याय
फ्लीट रिव्यू के तुरंत बाद 19 फरवरी से 25 फरवरी तक होने वाला ‘मिलन 2026’ नौसैनिक अभ्यास भारतीय समुद्री कूटनीति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। हार्बर फेज और सी फेज में आयोजित होने वाले इस अभ्यास में INS विक्रांत कैरियर बैटल ग्रुप के साथ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एयर डिफेंस और सर्च एंड रेस्क्यू जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लेगा। यह न केवल भारत की परिचालन क्षमता को परिभाषित करेगा, बल्कि मित्र देशों के साथ उसकी सामरिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई देगा।
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