चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को विधानसभा में बड़ा ऐलान करते हुए कांचीपुरम जिले के परंदूर में प्रस्तावित दूसरे चेन्नई ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के पक्ष में है, लेकिन इसके लिए किसानों की जमीन, जल निकायों और ग्रामीणों की आजीविका की कीमत नहीं चुकाई जा सकती। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा विधानसभा में धारा 110 के तहत की। फैसले के बाद विपक्षी डीएमके के विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।
‘किसान देश की रीढ़ हैं’, CM विजय ने गिनाए परियोजना रद्द करने के कारण
विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिसके लिए बड़ी संख्या में किसानों को उनकी जमीन से हटाना पड़े या गांवों और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, परंदूर परियोजना को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का लंबे समय से विरोध चल रहा था। उन्होंने 2025 में एगनापुरम और आसपास के 12 गांवों का दौरा किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना वापस लेने का फैसला किया है। करीब ₹20,000 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना को लेकर कृषि भूमि और जल निकायों पर संभावित प्रभाव भी सरकार के फैसले में महत्वपूर्ण कारक रहा।
चेन्नई को नया एयरपोर्ट मिलेगा, लेकिन परंदूर में नहीं
परंदूर परियोजना रद्द करने के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने की योजना सामने रखी है। मौजूदा मीनमबक्कम एयरपोर्ट की क्षमता फिलहाल करीब 3 करोड़ यात्रियों सालाना बताई गई है। निर्माणाधीन टर्मिनल-3 के शुरू होने के बाद यह क्षमता लगभग 3.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार की योजना आगे टर्मिनल-5 विकसित करने की भी है। इसके पूरा होने के बाद चेन्नई एयरपोर्ट की कुल यात्री क्षमता करीब 5.5 करोड़ यात्रियों सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही सरकार नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थान की तलाश भी जारी रखेगी। विशेषज्ञों की टीम संभावित जगहों का तकनीकी और व्यवहार्यता अध्ययन कर रही है। सरकार के अनुसार, नए स्थान का चयन करते समय कृषि भूमि, जल निकायों और आबादी पर न्यूनतम प्रभाव को प्राथमिकता दी जाएगी।
DMK ने फैसले का विरोध किया, विधानसभा से किया वॉकआउट
परंदूर एयरपोर्ट परियोजना रद्द किए जाने के फैसले के बाद विधानसभा में राजनीतिक टकराव देखने को मिला। DMK विधायकों ने सरकार के फैसले का विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष की ओर से इस फैसले को राज्य के औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं के लिए झटका बताया गया। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और पार्टी के अन्य नेताओं ने परियोजना को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। वहीं, भाजपा की ओर से भी परियोजना रद्द किए जाने को लेकर चिंता जताई गई। के. अन्नामलाई ने कहा कि चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट में देरी का असर तमिलनाडु के औद्योगिक विकास पर पड़ सकता है।
अब वैकल्पिक एयरपोर्ट साइट पर नजर
परंदूर परियोजना के रद्द होने के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती चेन्नई के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की जरूरत को पूरा करना होगी। सरकार का कहना है कि नया स्थान ऐसा चुना जाएगा जहां कृषि भूमि, जल स्रोतों और स्थानीय आबादी पर कम से कम असर पड़े, जबकि एयरपोर्ट की भविष्य की यात्री और कार्गो जरूरतों को भी पूरा किया जा सके। परंदूर परियोजना के रद्द होने के साथ ही चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट को लेकर वर्षों से चल रही बहस अब एक नए चरण में पहुंच गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार नए एयरपोर्ट के लिए किस स्थान को चुनती है और परियोजना को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जाता है।