संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले हुई सर्वदलीय बैठक और लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आए। विपक्ष ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा मामले, NEET पेपर लीक, मणिपुर, किसानों, एथनॉल नीति और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की है, जबकि सरकार ने सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की है।
आज से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेगी, जबकि विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन परिस्थितियों में सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है।
सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद
सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण और रचनात्मक ढंग से चलाने का आग्रह किया। हालांकि विपक्ष ने कई संवेदनशील मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए सरकार पर जवाब देने का दबाव बनाया। कई विपक्षी दलों ने कहा कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में विस्तृत बहस होनी चाहिए।
विपक्ष ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे
सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की मांग की, उनमें शामिल हैं—
- अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा (दान) मामले
- NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक
- एथनॉल नीति
- मणिपुर की कानून-व्यवस्था
- किसानों से जुड़े मुद्दे
- निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली
- छात्रों और युवाओं से जुड़े विषय
- विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए।
सरकार ने सहयोग की अपील की
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सत्र के दौरान कोई अतिरिक्त विधायी कार्य होगा तो उसकी जानकारी कार्य मंत्रणा समिति (BAC) में दी जाएगी। साथ ही उन्होंने सभी दलों से विधेयकों पर सार्थक चर्चा और सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की।
सर्वदलीय बैठक में हुआ बहिर्गमन
बैठक की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े कुछ नेताओं ने विरोध दर्ज कराया। विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के एक समूह को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई और कुछ समय के लिए बैठक से बहिर्गमन (वॉकआउट) किया।
कांग्रेस ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने राम मंदिर से जुड़े कथित दान मामले, एथनॉल नीति, छात्रों से जुड़े मुद्दों और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि इन विषयों का सीधा संबंध जनता से है और सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
समाजवादी पार्टी और DMK ने भी रखीं मांगें
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और सरकारी नौकरियों में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग (PDA) की कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया। वहीं, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सांसद तिरुची शिवा ने महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा और परिसीमन (Delimitation) पर सरकार से स्पष्ट नीति बताने की मांग की।
लोकसभा अध्यक्ष ने की सदन चलाने की अपील
सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक हुई। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि संसद की कार्यवाही गरिमापूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो, ताकि जनहित के विषयों पर व्यापक चर्चा हो सके। उन्होंने संसदीय परंपराओं के पालन और सकारात्मक संवाद पर विशेष जोर दिया।
इन विधेयकों पर रहेगी नजर
सरकार द्वारा सूचीबद्ध आठ विधेयकों के अलावा सत्र के दौरान अन्य महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव भी लाए जा सकते हैं। इसके साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए गए राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर भी सदन में तीखी बहस होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद के इस मानसून सत्र में कानून निर्माण के साथ-साथ राजनीतिक टकराव भी प्रमुख रूप से देखने को मिल सकता है।