पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बढ़ते सुरक्षा खतरों के मद्देनज़र भारतीय सेना ने सातवीं पिनाका रेजिमेंट को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। यह कदम न केवल सेना की फायरपावर को बढ़ाने वाला है, बल्कि दुश्मन के किसी भी संभावित खतरे का त्वरित और सटीक जवाब देने की क्षमता को भी मजबूत करता है। इस नई तैनाती के साथ अब सीमाओं पर कुल सात पिनाका रेजिमेंट सक्रिय हो चुकी हैं, जो देश की रक्षा रणनीति में एक अहम भूमिका निभा रही हैं।
रणनीतिक विस्तार की दिशा में बड़ा कदम
सेना की योजना केवल वर्तमान तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में इसे और व्यापक बनाया जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार आठवीं पिनाका रेजिमेंट के लिए आवश्यक साजो-सामान का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराया जा चुका है और इसे वर्ष 2026 के अंत तक सक्रिय कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त अगले वर्ष दो और रेजिमेंटों के शामिल होने की संभावना है, जिससे पिनाका रेजिमेंटों की कुल संख्या बढ़कर दस हो जाएगी। यह विस्तार भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का स्पष्ट संकेत है।
पिनाका की अद्भुत मारक क्षमता और तकनीक
पिनाका रॉकेट प्रणाली अपनी अत्यधिक मारक क्षमता और तीव्र गति से फायरिंग की विशेषता के लिए जानी जाती है। एक रेजिमेंट में सामान्यतः तीन बैटरियां होती हैं और प्रत्येक बैटरी छह लॉन्चर संचालित करती है। इस प्रकार एक रेजिमेंट में कुल 18 लॉन्चर सक्रिय रहते हैं। इन लॉन्चरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि केवल 44 सेकंड के भीतर एक बैटरी 72 रॉकेट दाग सकती है, जो बड़े क्षेत्र को बेहद कम समय में तबाह करने की क्षमता रखती है। यह क्षमता युद्ध के मैदान में निर्णायक साबित हो सकती है।
शूट एंड स्कूट तकनीक से दुश्मन पर बढ़त
पिनाका प्रणाली को अत्याधुनिक ‘शूट एंड स्कूट’ तकनीक के साथ विकसित किया गया है, जिससे यह फायरिंग के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है। इससे दुश्मन के लिए इस प्रणाली को निशाना बनाना बेहद कठिन हो जाता है। इसे उच्च गतिशीलता वाले विशेष ट्रकों पर स्थापित किया गया है, जो कठिन भूभाग में भी तेजी से संचालित हो सकते हैं। यह विशेषता पिनाका को आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाती है।
स्वदेशी तकनीक का सशक्त उदाहरण
पिनाका पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक उन्नत मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया है। इसके शुरुआती संस्करण की मारक क्षमता लगभग 40 किलोमीटर थी, लेकिन आधुनिक गाइडेड और लंबी दूरी वाले संस्करणों में यह क्षमता 120 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है। इससे यह प्रणाली गहराई में स्थित दुश्मन के ठिकानों, बंकरों और टैंकों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम हो गई है।
आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका
आज के युद्ध परिदृश्य में जहां गति, सटीकता और तकनीकी श्रेष्ठता महत्वपूर्ण है, वहां पिनाका जैसी प्रणाली सेना को निर्णायक बढ़त प्रदान करती है। सीमाओं पर इसकी बढ़ती तैनाती यह दर्शाती है कि भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार सुदृढ़ कर रहा है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिनाका रेजिमेंट का विस्तार न केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती देता है।
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