नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से लिखा कि बापू का शाश्वत संदेश हमें एक बेहतर समाज और विकसित भारत की दिशा में मार्गदर्शन करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बापू का पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा की मिसाल था जो हर दौर में मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए भी देशवासियों से संवाद करते हुए इस दिन के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश के लिए इस दिन का विशेष महत्व सभी लोग भली-भांति समझते हैं। बापू के विचारों पर ही भारत विकसित राष्ट्र बनेगा, यही भावना उनके शब्दों में गहरी झलक रही थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले वर्षों में भी महात्मा गांधी की विचारधारा मानवता का मार्गदर्शन और प्रेरणा देती रहेगी।
बापू की विचारधारा का वैश्विक प्रभाव
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस बात पर विशेष बल दिया कि बापू की विचारधारा ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। महात्मा गांधी एक ऐसी शख्सियत हैं जो सत्ता से दूर रहने के बावजूद करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा के इन मूल्यों ने न केवल भारत की स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और करुणा का संदेश फैलाया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी बापू के ये आदर्श मानवता को सही राह दिखाते रहेंगे। उन्होंने स्मरण कराया कि बापू का जीवन सरलता, सेवा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण था। इन विचारों ने समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम किया और आज भी वे उतने ही प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार बापू की शिक्षाएं विकसित भारत के निर्माण में आधारशिला का काम करेंगी।
स्वदेशी और खादी अपनाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी के स्वदेशी के आह्वान को दोहराते हुए सभी देशवासियों से अपील की कि दो अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद अवश्य खरीदें और गर्व से कहें कि यह स्वदेशी है। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने हमेशा सभी को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और इस प्रक्रिया में खादी हमेशा प्राथमिकता रही। खादी न केवल आत्मनिर्भरता का प्रतीक है बल्कि स्थानीय कारीगरों और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का माध्यम भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी अपनाने से न केवल बापू के सपनों को साकार किया जा सकता है बल्कि देश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलती है। उन्होंने आग्रह किया कि इस दिन हर नागरिक खादी को अपनाकर बापू के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करे। यह अपील विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दो अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्व
भारत के इतिहास में दो अक्टूबर की तारीख का विशेष महत्व है। यह तारीख देश की दो महान विभूतियों के जन्मदिन के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनके कार्यों तथा विचारों ने देश की स्वतंत्रता और इसके बाद आजाद भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई। अहिंसा के इस पुजारी के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस ऐतिहासिक पहलू को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बापू के जन्मदिन पर देश न केवल श्रद्धांजलि अर्पित करता है बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प भी लेता है। यह दिन राष्ट्र को एकजुट करने और मूल्यों की याद दिलाने का अवसर प्रदान करता है।
लाल बहादुर शास्त्री की जयंती और योगदान
दो अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है। उनका जन्म दो अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनकी सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे। उन्होंने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जय जवान जय किसान का नारा दिया था जो आज भी देश की रक्षा और कृषि दोनों क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से इस दिन की दोनों विभूतियों के योगदान को याद करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके महत्व को रेखांकित किया। शास्त्री जी की सादगीपूर्ण जीवनशैली और देशभक्ति आज भी युवाओं के लिए आदर्श है। उनके विचारों ने देश को कठिन परिस्थितियों में मजबूती प्रदान की। इस दिन दोनों महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर देश उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेता है।