नई दिल्ली. भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमानों की खरीद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। इस बीच भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है जिसे लेकर फ्रांस पसोपेश में है। भारत ने कहा है कि वह इन लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाएगा। हालांकि फ्रांस इसके लिए अब तक तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारत ने फ्रांस को दो टूक कह दिया है कि अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो सौदा भी नहीं हो सकता। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और स्वदेशी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रहा है।
विमान निर्माण और स्वदेशी प्रणाली
राफेल लड़ाकू विमान खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस से बनकर आने हैं जबकि 96 विमान भारत में बनने हैं। भारत इन विमानों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली यानी देश में निर्मित मिसाइल राडार आदि स्थापित करना चाहता है। यह मांग आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है। स्वदेशी हथियारों के एकीकरण से रखरखाव और भविष्य के उन्नयन में आसानी होगी। भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्वदेशी प्रणालियों के एकीकरण पर जोर देती रही है।
फ्रांस का रुख और असहमति
वहीं फ्रांस का कहना है कि भारत को राफेल में जोड़ी जाने वाली रक्षा प्रणालियां भी फ्रांस से ही लेनी चाहिए। इसे लेकर जारी बातचीत में भारत ने स्पष्ट तौर पर यह संकेत दे दिए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है और स्वदेशी हथियारों को तरजीह दे रहा है। ऐसे में फ्रांस को यह शर्त माननी ही होगी। इससे राफेल सौदे में नया मोड़ आ गया है। फ्रांस की अनिच्छा के बावजूद भारत अपने रुख पर अडिग है।
सोर्स कोड और एतराज का मुद्दा
वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा कि बिना सोर्स कोड दिए भारतीय हथियार प्रणाली राफेल में लगाने पर फ्रांस को कोई एतराज नहीं होना चाहिए। स्वदेशी मिसाइल और राडार जैसी प्रणालियों को एकीकृत करने से विमान की क्षमता भारतीय जरूरतों के अनुरूप बढ़ेगी। फ्रांस की आपत्ति तकनीकी और व्यावसायिक दोनों पहलुओं से जुड़ी हो सकती है। लेकिन भारत स्पष्ट है कि स्वदेशी प्रणालियों का एकीकरण सौदे का अहम हिस्सा है।
सौदे पर प्रभाव और आगे की बातचीत
इस शर्त के कारण राफेल सौदे की बातचीत में नया मोड़ आ गया है। भारत आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है। फ्रांस यदि इस मांग को स्वीकार करता है तो सौदा आगे बढ़ सकता है। वायुसेना अधिकारी के अनुसार स्वदेशी प्रणालियों के बिना समझौता संभव नहीं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय पर सहमति बनने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।