नई दिल्ली- NEET UG री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए इसे छात्रों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने के बजाय उन लाखों छात्रों को परेशान कर रही है, जो पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल करते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय दिखावटी कदम उठा रही है।
राहुल गांधी बोले- चोर नहीं, छात्रों को सजा दी जा रही
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि लाखों छात्र वर्षों से टेलीग्राम पर नोट्स, टेस्ट सीरीज, स्टडी मटेरियल और चर्चा समूहों के जरिए परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना पेपर लीक का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ितों को ही सजा दे रही है। राहुल ने सवाल उठाया कि अगर टेलीग्राम बंद करने से भी समस्या हल नहीं हुई तो आगे किस प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
'जेबें कैंची से काटी जाएंगी, फिर WhatsApp की बारी?'
कांग्रेस नेता ने सरकार की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दिन छात्रों की सख्त तलाशी होगी, जेबें तक काटी जाएंगी, प्रश्नपत्र वायुसेना के जरिए भेजे जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की जड़ पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक माफिया सरकार की निगरानी में फल-फूल रहा है और लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है।
मोदी सरकार से की सीधी अपील
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि दिखावा छोड़कर असली दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार को उनकी चिंताओं को सुनना चाहिए। राहुल ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानता है और वह अन्याय को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा।
टेलीग्राम फाउंडर ने भी जताई आपत्ति
टेलीग्राम के फाउंडर ने भी भारत सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर लीक सामग्री साझा किए जाने के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इससे 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं, जबकि पेपर लीक जैसी गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म पर जारी रह सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
CEO बोले- सैकड़ों चैनल पहले ही हटाए जा चुके
टेलीग्राम के CEO ने कहा कि कंपनी ने पिछले कुछ सप्ताह में परीक्षा सामग्री और फर्जी पेपर लीक से जुड़े सैकड़ों चैनलों को हटाया है। साथ ही एडिट किए गए मैसेज की पहचान को और स्पष्ट बनाया जा रहा है ताकि बैकडेटिंग और फर्जी कंटेंट से जुड़े मामलों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम लगातार जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना गलत कदम है।
21 जून को होना है NEET UG री-एग्जाम
गौरतलब है कि NEET UG परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) 21 जून को री-एग्जाम कराने जा रही है। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसी फैसले को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
बैन को लेकर अदालत में भी पहुंचा मामला
सरकार के आदेश के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। कंपनी का कहना है कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है और इससे करोड़ों वैध उपयोगकर्ताओं को परेशानी हो रही है। अदालत में इस मामले की सुनवाई होने जा रही है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।