जोधपुर, 16 जुलाई। राजस्थान के न्यायिक और जेल प्रशासन के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब दो उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी जेल परिसर के भीतर विवाह बंधन में बंधेंगे। जोधपुर स्थित मंडोर ओपन एयर कैंप (ओपन जेल) में 22 जुलाई को मूलाराम भाटी (33) और सीमा (31) सात फेरे लेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस विवाह की अनुमति देते हुए इसे जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है। दोनों दोषी अलग-अलग हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। जेल में साथ रहते हुए दोनों के बीच परिचय हुआ, जो धीरे-धीरे प्रेम में बदल गया और अब हाईकोर्ट की अनुमति के बाद दोनों विवाह करने जा रहे हैं।
जेल में हुई मुलाकात, खेती के दौरान बढ़ीं नजदीकियां
मूलाराम भाटी करीब दो वर्ष पहले अजमेर जेल से जोधपुर के मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किए गए थे। वहीं मुंबई निवासी सीमा को लगभग डेढ़ वर्ष पहले महिला जेल से इसी ओपन जेल में भेजा गया। ओपन जेल के नियमों के अनुसार दोनों खेती और अन्य कार्यों में शामिल होते थे। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। बाद में दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया।
सीमा की सहेली के पिता करेंगे कन्यादान
शादी को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। निमंत्रण पत्र में दुल्हन के पिता के स्थान पर सीमा की सहेली के पिता का नाम लिखा गया है, जो विवाह समारोह में कन्यादान की रस्म निभाएंगे। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार पूरा विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में जेल प्रशासन की निगरानी में आयोजित किया जाएगा।
दोनों किस मामले में काट रहे हैं सजा?
मूलाराम भाटी को अपने पड़ोसी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई थीं और उन्हें भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दोनों वर्तमान में ओपन जेल में सजा काट रहे हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने विवाह की अनुमति देते हुए कहा कि जेल सुधार व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापना का अवसर देना भी है। अदालत ने अपने आदेश में वर्ष 2022 के 'नंदलाल बनाम राज्य' मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया।
क्यों खास माना जा रहा है यह फैसला?
यह निर्णय राजस्थान की जेल व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश भविष्य में कैदियों के संवैधानिक अधिकारों, गरिमा और पुनर्वास से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है। वर्ष 2017 से न्यायिक अभिरक्षा में रह रहे मूलाराम की याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था में पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना दंड।
ओपन जेल क्या होती है?
ओपन जेल (Open Air Camp) ऐसी सुधारात्मक जेल व्यवस्था होती है, जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को अपेक्षाकृत कम सुरक्षा व्यवस्था के बीच रहने और काम करने की अनुमति दी जाती है। यहां कैदी खेती, श्रम और अन्य कार्य करते हैं ताकि वे समाज में पुनर्वास के लिए तैयार हो सकें।
निष्कर्ष
मंडोर ओपन जेल में होने वाला यह विवाह राजस्थान की जेल व्यवस्था और न्यायिक इतिहास में एक नई मिसाल माना जा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले ने यह संदेश दिया है कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था में पुनर्वास, मानवीय गरिमा और संवैधानिक अधिकारों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक संदर्भ बन सकता है।