नई दिल्ली. इक्कीस मई 2026 को पूरा देश भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता दिखाई दिया। विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। यह अवसर केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री को स्मरण करने का नहीं था, बल्कि उस दूरदर्शी नेतृत्व को याद करने का भी था जिसने भारत को आधुनिकता, तकनीकी प्रगति और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में अग्रसर करने का साहसिक प्रयास किया। उनके योगदान को आज भी स्वतंत्र भारत के विकास के महत्वपूर्ण अध्यायों में गिना जाता है।
वीर भूमि पर उमड़ा सम्मान, नेताओं ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित वीर भूमि पर आयोजित गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा अपने परिवार के साथ उपस्थित हुए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अशोक गहलोत, पी. चिदंबरम और भूपिंदर सिंह हुड्डा सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने भी राजीव गांधी के राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण किया। वहीं केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जहाँ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का प्रमुख शिल्पकार बताया।
नई सदी के भारत का सपना देखने वाले नेता
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संदेश में राजीव गांधी को भारत का अद्भुत सपूत बताते हुए कहा कि उन्होंने दूरदर्शिता और साहस के साथ देश को इक्कीसवीं सदी की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने राजीव गांधी के उस प्रसिद्ध विचार को याद किया जिसमें उन्होंने भारत को एक प्राचीन देश होते हुए भी युवा राष्ट्र बताया था और एक मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर तथा विश्व के अग्रणी देशों में स्थान पाने वाले भारत का सपना व्यक्त किया था। यह दृष्टि केवल राजनीतिक घोषणा नहीं थी, बल्कि आने वाले दशकों की विकास यात्रा की स्पष्ट रूपरेखा थी, जिसका प्रभाव आज भी देश की नीतियों और विकास मॉडल में दिखाई देता है।
तकनीकी और दूरसंचार क्रांति के अग्रदूत
राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में तकनीकी जागरण और दूरसंचार विस्तार के महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कंप्यूटरीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिक संचार व्यवस्था को बढ़ावा देकर देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। उस समय लिए गए निर्णयों ने आगे चलकर डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन प्रशासन और तकनीकी नवाचारों के लिए मजबूत आधार तैयार किया। आज जब भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, तब राजीव गांधी की दूरदृष्टि का महत्व और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
युवाओं और लोकतंत्र को नई शक्ति देने वाले फैसले
राजीव गांधी ने लोकतांत्रिक भागीदारी को व्यापक बनाने के उद्देश्य से मतदान की आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस कदम ने करोड़ों युवाओं को लोकतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया और उन्हें देश की निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान किया। इसके साथ ही उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की उनकी सोच ने गांवों तक लोकतंत्र की पहुंच को विस्तार दिया और जनभागीदारी आधारित विकास की अवधारणा को नई मजबूती प्रदान की।
शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास पर विशेष बल
राजीव गांधी का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके नागरिकों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर करती है। उनके नेतृत्व में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम जैसे प्रयासों को बढ़ावा मिला, जिनका उद्देश्य देश के बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करना था। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने ऐसे सुधारों को प्रोत्साहित किया जिनसे आधुनिक और समावेशी शिक्षा व्यवस्था की नींव मजबूत हुई। उनकी नीतियों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं था, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास के लाभ पहुँचाना भी था।
सबसे युवा प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रतीक तक
सन् 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के बाद देश एक कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में मात्र चालीस वर्ष की आयु में राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली और भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। उनके नेतृत्व में प्रशासनिक सुधार, तकनीकी विकास, शिक्षा विस्तार और आधुनिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। दिसंबर 1989 तक के उनके कार्यकाल ने भारत के विकास पथ को नई दिशा प्रदान की और आने वाले दशकों के लिए परिवर्तन की मजबूत आधारशिला तैयार की।
बलिदान जिसने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया
बीस अगस्त 1944 को जन्मे राजीव गांधी का जीवन राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित रहा। इक्कीस मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में चुनाव प्रचार के दौरान हुए आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई। यह घटना भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है। उनके असामयिक निधन ने देश को गहरा आघात पहुँचाया, लेकिन उनकी विचारधारा और विकास की सोच आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
आज भी जीवंत है आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत का उनका सपना
राजीव गांधी की विरासत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आज भी भारत के विकास विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तकनीकी प्रगति, लोकतांत्रिक सशक्तिकरण, ग्रामीण भागीदारी और युवा शक्ति पर आधारित उनका दृष्टिकोण वर्तमान भारत की अनेक नीतियों में परिलक्षित होता है। उनकी पुण्यतिथि पर देश न केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, बल्कि उस संकल्प को भी दोहरा रहा है जिसमें आधुनिक, समावेशी, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत का सपना निहित था। राजीव गांधी का जीवन और उनका विजन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में साहसिक सोच और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।