कोलकाता:एक समय था जब संदेशखाली का नाम लेते ही लोगों के मन में रॉयल बंगाल टाइगर और प्राकृतिक आपदाओं की तस्वीर उभरती थी। लेकिन 2024 के बाद से यह इलाका पूरी तरह बदल चुका है। अब उत्तर 24 परगना का संदेशखाली पश्चिम बंगाल की राजनीति का हाई-वोल्टेज केंद्र बन गया है।
राजनीतिक इतिहास और बदलता समीकरण
संदेशखाली विधानसभा सीट कभी वामपंथी दलों, खासकर सीपीएम का गढ़ मानी जाती थी। 2016 में यहां पहली बार सत्ता परिवर्तन हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। 2021 के चुनाव में भी तृणमूल ने इस सीट को बरकरार रखा 2021 में तृणमूल उम्मीदवार सुकुमार महतो ने 1,12,450 वोट हासिल कर बीजेपी के भास्कर सरदार को 39,685 वोटों से हराया था। बीजेपी को 72,765 वोट मिले थे, जबकि नोटा में 2,456 वोट पड़े। वोट प्रतिशत के लिहाज से तृणमूल को करीब 55% और बीजेपी को लगभग 35% वोट मिले थे।
2024 के बाद बढ़ी सियासी संवेदनशीलता
2024 लोकसभा चुनाव से पहले संदेशखाली-2 ब्लॉक में हुई घटनाओं ने पूरे इलाके को सुर्खियों में ला दिया। ईडी पर हमले और तृणमूल नेता शेख शाहजहां पर महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों ने इस क्षेत्र को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया। विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। हालांकि, लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने बसीरहाट सीट पर कब्जा बरकरार रखा और नुरुल इस्लाम ने जीत हासिल की। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी तृणमूल ने जीत दर्ज की।
2026 चुनाव में नए चेहरे
2026 विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल ने सुकुमार महतो को टिकट नहीं दिया है और झरना सरदार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बीजेपी ने सनत सरदार को मैदान में उतारा है। कांग्रेस और सीपीएम भी यहां अपने उम्मीदवारों के साथ चुनावी मुकाबले में हैं।
चुनावी मुद्दे क्या हैं?
इस बार संदेशखाली में चुनाव के मुख्य मुद्दों में महिलाओं की सुरक्षा, स्थानीय विकास और कानून-व्यवस्था शामिल हैं। इसके अलावा मतदाता सूची (SIR) में नाम कटने का मुद्दा भी चर्चा में है। तृणमूल का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और विकास उनकी प्राथमिकता है, जबकि बीजेपी दावा कर रही है कि इस बार जनता का समर्थन उनके पक्ष में है।
नतीजों पर टिकी नजर
संदेशखाली सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है। अब देखना होगा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में यहां की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है। इसका फैसला 4 मई को मतगणना के दिन होगा।