गंगटोक। उत्तर सिक्किम के प्रमुख पर्यटन स्थल लाचेन में करीब 1600 पर्यटक फंस गए हैं, जब 5 अप्रैल को एक बड़े भूस्खलन ने इसे जिला मुख्यालय मंगन से जोड़ने वाली सड़क को बाधित कर दिया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बर्फबारी ने बढ़ाई मुश्किलें
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए 7 अप्रैल से शुरू हुई बर्फबारी 8 अप्रैल तक जारी रही, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त सड़कों की हालत और बिगड़ गई। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में लगातार खराब मौसम ने राहत कार्यों को भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ठंड और फिसलन भरे रास्तों के कारण आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
सेना का ‘हिमसेतु’ अभियान शुरू
हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन हिमसेतु’ नामक राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। पूर्वी कमान के तहत त्रिशक्ति कोर के जवानों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए वैकल्पिक मार्गों को सक्रिय किया और महत्वपूर्ण दर्रों को खोलने का प्रयास किया। हालांकि प्रतिकूल मौसम के कारण इस अभियान की गति प्रभावित हुई है।
सीमित संख्या में पर्यटकों की निकासी
गुरुवार सुबह तक करीब 150 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला जा सका है। सेना और स्थानीय प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं कि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता और रास्तों की खराब स्थिति के कारण यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
पर्यटन स्थल की लोकप्रियता और बढ़ती भीड़
लाचेन सिक्किम के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह क्षेत्र मार्च की शुरुआत में दो वर्षों से अधिक समय बाद पर्यटकों के लिए दोबारा खोला गया था। इससे पहले अक्टूबर 2023 में ग्लेशियल झील फटने की घटना के कारण यह इलाका लंबे समय तक बंद रहा था। सड़क संपर्क बहाल होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी थी।
प्राकृतिक आपदाओं से जूझता हिमालयी क्षेत्र
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है। भूस्खलन, बर्फबारी और अचानक मौसम परिवर्तन यहां आम चुनौतियां हैं, जो न केवल पर्यटन बल्कि स्थानीय जीवन को भी प्रभावित करती हैं। प्रशासन और सेना की तत्परता के बावजूद, ऐसे क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।