नागपुर - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर महानगर के घोष पथक के इतिहास को पहली बार हस्तलिखित रूप में संकलित किया गया है। इस विशेष दस्तावेज़ का लोकार्पण संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में डॉ. हेडगेवार स्मृतिमंदिर परिसर में किया गया।
संघ का पूरा कार्य स्वयंसेवकों के परिश्रम पर आधारित है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि, संघ का पूरा कार्य स्वयंसेवकों के समर्पण और परिश्रम पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि, संघ का कार्य किसी की कृपा से खड़ा नहीं हुआ और न ही किसी की अकृपा से रुका है। इसका कारण यह है कि स्वयंसेवकों ने संघ को अपना मानकर राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी शक्ति लगा दी। उन्होंने कहा कि, आज संघ देश को दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में खड़ा है।
संघ का उद्देश्य श्रेय लेना नहीं, समाज को देना है
संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि, संघ में किए जाने वाले सभी कार्य संस्कार निर्माण के लिए होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि, संघ की इच्छा नहीं है कि उसका नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए, बल्कि संघ पूरे समाज को श्रेय देना चाहता है।
संगठन और अनुशासन पर जोर
डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू समाज की एकता और संगठन पर जोर देते हुए कहा कि सभी को एक स्वर में, एक कदम से चलने का अभ्यास करना चाहिए। संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, शरीर की क्रिया का असर मन पर पड़ता है। शरीर के अभ्यास से मन का निर्माण होता है - यह वैज्ञानिक सत्य है।
यह कार्यक्रम संघ की परंपराओं, इतिहास और संगठनात्मक संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसमें घोष पथक की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।