नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने गुरुवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से वापस लौट चुका है। यह घोषणा 15-Oct.-2026 को की गई जो दीर्घकालिक औसत के अनुसार सामान्य तिथि के आसपास है। विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून का आधिकारिक मौसम 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है लेकिन कई हिस्सों में बारिश अक्टूबर के मध्य तक जारी रहती है। इस वर्ष वापसी सामान्य समय पर हुई जिससे कृषि और जल प्रबंधन के लिए राहत की स्थिति बनी है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे संतुलित मानसूनी चक्र का संकेत बताया है। पूरे देश में मानसून की सक्रियता समाप्त होने के साथ अब सर्दियों की तैयारी शुरू हो जाएगी।
उत्तर-पूर्व मानसून की शुरुआत और प्रभावित राज्य
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के साथ ही उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश दक्षिण भारत के कई हिस्सों में शुरू हो गई। तमिलनाडु पुडुचेरी आंध्र प्रदेश केरल और कर्नाटक में व्यापक वर्षा दर्ज की गई। उत्तर-पूर्व मानसून मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी भागों को प्रभावित करता है और इसकी बारिश दिसंबर तक जारी रह सकती है। IMD के अधिकारियों ने बताया कि सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 15 अक्टूबर या उसके बाद होती है और लगभग उसी समय उत्तर-पूर्व मानसून दक्षिण प्रायद्वीप में स्थापित हो जाता है। इस वर्ष दोनों घटनाएं एक ही दिन हुईं जिससे मौसमी संक्रमण सुचारू रहा। दक्षिण भारत के किसानों के लिए यह बारिश रबी फसलों की तैयारी में सहायक सिद्ध होगी।
सामान्य वापसी तिथि और पिछले वर्षों का तुलनात्मक रिकॉर्ड
दीर्घकालिक औसत के अनुसार पूरे देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वापसी तिथि 15 अक्टूबर मानी जाती है। पिछले वर्ष 2025 में यह वापसी 16-Oct. को हुई थी जबकि 2024 में भी 15-Oct. को ही घोषित की गई थी। वर्ष 2023 में 19-Oct. 2022 में 23-Oct. और 2021 में 25-Oct. को वापसी हुई थी। वर्ष 2000 के बाद सबसे विलंबित वापसी 2010 में 29-Oct. को दर्ज की गई थी। इस वर्ष की समय पर वापसी को संतोषजनक माना जा रहा है क्योंकि विलंब से फसल चक्र और जल संसाधन प्रबंधन प्रभावित होता है। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में वापसी की तिथियों में उतार-चढ़ाव रहा है लेकिन दीर्घकालिक प्रवृत्ति सामान्य सीमा के भीतर है।
दक्षिण भारत में सक्रिय मौसमी प्रणालियां
IMD के अनुसार दक्षिण भारत में कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं जो बारिश में योगदान दे रही हैं। दक्षिण तटीय तमिलनाडु के ऊपर निचले क्षोभमंडल स्तर पर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हवाएं दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत तथा बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी मध्य और निकटवर्ती उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में निचले स्तर पर स्थापित हो चुकी हैं। इन प्रणालियों के प्रभाव से तमिलनाडु पुडुचेरी कारैकल और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश तथा दक्षिण रायलसीमा के आसपास के क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों में व्यापक वर्षा हुई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये प्रणालियां आने वाले दिनों में भी सक्रिय रह सकती हैं जिससे दक्षिण भारत में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा
15-Oct.-2026 तक के 24 घंटों में तमिलनाडु पुडुचेरी और कारैकल में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई। दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण रायलसीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में भी पर्याप्त बारिश हुई। इस वर्षा से जलाशयों के स्तर में सुधार होने की उम्मीद है जो गर्मी के महीनों में पानी की कमी को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई इस बारिश से मिट्टी की नमी बनी रहेगी और रबी फसलों की बुवाई को बल मिलेगा। हालांकि भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ की आशंका को लेकर प्रशासन सतर्क है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भी दक्षिण भारत में बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।
मानसून चक्र का महत्व और आगे की संभावनाएं
दक्षिण-पश्चिम मानसून की समय पर वापसी और उत्तर-पूर्व मानसून की शुरुआत भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी बारिश रबी सीजन की फसलों के लिए जीवनदायी होती है जबकि उत्तर भारत में मानसून की वापसी के बाद सर्दी का मौसम स्थापित होने लगता है। IMD के अनुसार आने वाले दिनों में दक्षिणी प्रायद्वीप में मौसमी प्रणालियां सक्रिय रहेंगी जिससे बारिश का दौर जारी रह सकता है। किसान और जल प्रबंधन एजेंसियों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय पूर्वानुमानों पर ध्यान दें। कुल मिलाकर इस वर्ष का मानसूनी संक्रमण सामान्य और संतुलित रहा है जो दीर्घकालिक औसत के अनुरूप है तथा कृषि एवं जल सुरक्षा दोनों के लिए सकारात्मक संकेत देता है।