नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ियों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
CBI जांच या पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज से जांच की मांग
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई है। याचिका में JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने जांच राज्य की एजेंसी से हटाकर CBI को सौंपने या किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी है।
19 अप्रैल 2026 को हुई थी परीक्षा
मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है, जिसका आयोजन 19 अप्रैल 2026 को किया गया था। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
सबूत सुरक्षित रखने की भी मांग
याचिका में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इनमें मूल OMR शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज, सर्वर डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं, ताकि जांच के दौरान किसी तरह के सबूत से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
झारखंड में लंबे समय से चल रहा है परीक्षा विवाद
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने हाल में कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया है। वहीं, इन फैसलों के बाद सफल अभ्यर्थियों की ओर से भी विरोध सामने आया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला और पेचीदा
इस बीच झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। इससे परीक्षा और नियुक्तियों को लेकर कानूनी स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार के जवाब के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।