नई दिल्ली/मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबाड़ी में एसआईआर (SIR) कार्य में लगे जजों को बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को अगले दो महीनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
'कागजों तक सीमित न रहे जांच'
सुनवाई के दौरान एनआईए ने सीलबंद लिफाफे में अपनी स्टेटस रिपोर्ट जमा की। एनआईए के वकील ने बताया कि जांच अभी जारी है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "यदि जांच पूरी हो गई है, तो चार्जशीट दाखिल करें। हम नहीं चाहते कि यह मामला केवल कागजों तक ही सीमित रहे।" कोर्ट ने एनआईए से यह भी पूछा कि क्या गिरफ्तार किए गए आरोपियों का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध है?
जजों की सुरक्षा पर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोथाबाड़ी कांड के शिकार जजों की सुरक्षा फिलहाल बरकरार रखी जाए। हालांकि, कोर्ट ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को यह छूट दी है कि यदि वे महसूस करते हैं कि किसी जज को अब कोई खतरा नहीं है, तो वे सुरक्षा हटाने के संबंध में उचित कदम उठा सकते हैं। सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक (SP) के पास होगी।
क्या है मोथाबाड़ी कांड?
इसी साल अप्रैल में मालदा के मोथाबाड़ी और सुजापुर इलाकों में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान उत्तेजित भीड़ ने कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय के अंदर एसआईआर के काम में लगे सात जजों को रात भर बंधक बनाकर रखा था। एनआईए पहले ही कोर्ट को बता चुकी है कि इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार किया जा चुका है।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसी को तय समय सीमा के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करनी होगी।