नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अपने प्रमुख ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण को मार्च 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने वित्त मंत्रालय से विस्तार की मंजूरी मांगी थी जिसे प्रदान कर दिया गया। इस विस्तार से सरकार को संघीय बजट 2027-28 में योजना के लिए लगभग 7000 करोड़ रुपये आवंटित करने का अवसर मिलेगा। विभाग को निर्देश दिया गया है कि कार्यक्रम के कुल परिव्यय के भीतर सभी शेष गांवों को निर्धारित समय सीमा तक ओडीएफ प्लस प्रमाणपत्र दिलाना सुनिश्चित करे। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2028 के बाद कोई और समय विस्तार नहीं माना जाएगा। यह कदम ग्रामीण स्वच्छता लक्ष्यों को पूर्णता तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओडीएफ प्लस स्थिति का लक्ष्य और उसकी परिभाषा
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि शेष सभी गांव 31 मार्च 2028 तक ओडीएफ प्लस का प्रमाणपत्र प्राप्त कर लें। विभाग की परिभाषा के अनुसार ओडीएफ प्लस गांव वह है जो अपनी खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखता हो ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करता हो तथा दृष्टिगत रूप से स्वच्छ हो। यह मानक पहले के ओडीएफ स्तर से आगे बढ़कर समग्र स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर देता है। विस्तार का मुख्य उद्देश्य इन्हीं मानकों को देश के हर गांव तक पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि केवल शौचालय निर्माण पर्याप्त नहीं बल्कि उनकी निरंतर उपयोगिता और गांव की समग्र स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। इस दिशा में अब अंतिम चरण की तैयारी तेज कर दी गई है।
अब तक की प्रगति और शेष गांवों का कार्यभार
योजना के डैशबोर्ड पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश के कुल 5.86 लाख गांवों में से 5.70 लाख गांवों को पहले ही ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। शेष लगभग सोलह हजार गांवों को निर्धारित मानकों पर खरा उतरना बाकी है। इन गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ दृश्य स्वच्छता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक हुई प्रगति को देखते हुए अंतिम चरण को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। विभाग को इन शेष गांवों में तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। समयबद्ध तरीके से लक्ष्य हासिल करने पर ही योजना की सफलता निर्भर करेगी।
वित्तीय आवंटन और आगामी बजट की संभावना
विस्तार के कारण सरकार आगामी संघीय बजट 2027-28 में योजना के लिए करीब 7000 करोड़ रुपये आवंटित कर सकती है। इससे पहले वर्ष 2026-27 के लिए 7192 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा चुका है। यह राशि मुख्य रूप से शेष कार्यों को पूरा करने अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने में लगाई जाएगी। वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग से ही निर्धारित लक्ष्य समय पर हासिल किए जा सकेंगे। सरकार का प्रयास है कि उपलब्ध परिव्यय के भीतर ही सभी गतिविधियां पूरी हों। बजट प्रावधान योजना की अंतिम चरण की गति को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।
मूल स्वीकृति और कुल परिव्यय का विवरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 फरवरी 2020 को योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दी थी। शुरू में इसे 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था जिसे बाद में 15वें वित्त आयोग की अवधि के अंत तक बढ़ाया गया और मार्च 2027 तक लागू रखने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2020 में कुल 140881 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी गई थी जिसमें से 52497 करोड़ रुपये पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बजट से उपलब्ध कराए जाने थे। शेष राशि 15वें वित्त आयोग महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और राजस्व सृजन मॉडल से जुटाई जानी थी। इस वित्तीय ढांचे के अंतर्गत ही अब अंतिम विस्तार किया गया है।
भविष्य की समयसीमा और लक्ष्य प्राप्ति की अनिवार्यता
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च 2028 तक शेष सभी गांवों को ओडीएफ प्लस प्रमाणपत्र दिलाना अनिवार्य है और इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। विभाग को उपलब्ध संसाधनों के भीतर ही कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह समयसीमा ग्रामीण भारत को पूर्ण स्वच्छता की दिशा में अंतिम धक्का देने वाली साबित हो सकती है। सफल क्रियान्वयन से न केवल स्वच्छता मानकों में सुधार होगा बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार अब अंतिम चरण पर पूरी तरह केंद्रित है ताकि निर्धारित तिथि तक लक्ष्य हासिल किया जा सके।