लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर (बसपा) ने जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने एक बार फिर सामाजिक संतुलन की राजनीति के तहत ब्राह्मण समाज को अपने साथ जोड़ने का फैसला किया है। इस कड़ी में बसपा ने शुरुआती कदम उठाते हुए जालौन की माधौगढ़ सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
ब्राह्मण प्रत्याशी को पहला टिकट, साफ हुआ संकेत
बसपा ने जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट से आशीष पांडेय को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसे पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति का पहला संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ब्राह्मण समाज की नाराजगी और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह वर्ग निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
मायावती के नेतृत्व में फिर सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस
बसपा सुप्रीमो ने हाल के महीनों में कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है। यूजीसी के नए नियमों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के रुख के बाद अब यह साफ हो गया है कि बसपा 2007 के अपने सफल सोशल इंजीनियरिंग मॉडल को दोबारा लागू करने की तैयारी में है, जिसमें ब्राह्मण-दलित-पिछड़ा वर्ग का संतुलन साधा गया था।
80 सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की तैयारी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव में करीब 80 सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतार सकती है। इनमें से लगभग 50 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम जून तक घोषित किए जाने की संभावना है, ताकि प्रत्याशी समय रहते अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन और प्रचार को मजबूत कर सकें।
कमजोर सीटों पर पहले होगा ऐलान
खास बात यह है कि जिन सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा बेहद कम अंतर से हारी थी, वहां प्रत्याशियों की घोषणा प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। पार्टी का लक्ष्य है कि शुरुआती बढ़त बनाकर विपक्षी दलों पर दबाव बनाया जाए।
जून से तेज होगा चुनावी अभियान
बसपा नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी के केंद्रीय संयोजक अप्रैल के अंत से चुनावी दौरे शुरू कर सकते हैं। जिन सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी होगी, वहां रोड शो और जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा अन्य राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता उत्तर प्रदेश में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कांशीराम की जयंती से मिलेगा अभियान को धार
इससे पहले आकाश आनंद 15 मार्च को पार्टी संस्थापक की जयंती के अवसर पर राजस्थान के भरतपुर में आयोजित रैली में हिस्सा लेंगे। पार्टी इसे चुनावी अभियान की वैचारिक शुरुआत के रूप में देख रही है।
2012 के बाद कमजोर हुई बसपा, अब वापसी का लक्ष्य
गौरतलब है कि वर्ष 2012 के बाद से हुए विधानसभा चुनावों में बसपा को लगातार झटके लगे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पार्टी का केवल एक विधायक है। लोकसभा चुनावों में भी प्रदर्शन कमजोर रहा, जिसके बाद पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव का फैसला किया है।
2027 में सत्ता वापसी का रोडमैप
बसपा का मानना है कि सामाजिक समीकरणों को दोबारा साधकर और संगठन को मजबूत कर वह 2027 में बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर सकती है। ब्राह्मण समाज को केंद्र में रखकर बनाई जा रही यह रणनीति आगामी महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है।
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