मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में कथित तौर पर दूषित पानी से हुई 35 मौतों के मामले की जांच अब आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए आयोग गठित करने का आदेश दिया था।
पूर्व जस्टिस सुनील कुमार गुप्ता करेंगे जांच की अगुवाई
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पूर्व न्यायाधीश सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया गया है। आयोग को घटना से जुड़े सभी पहलुओं—पानी की गुणवत्ता, प्रशासनिक स्तर पर हुई संभावित लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने—की गहराई से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हुई या नहीं और किन विभागों की भूमिका संदिग्ध रही।
28 फरवरी तक साक्ष्य जमा करने की अपील
आयोग ने भागीरथपुरा के निवासियों से आग्रह किया है कि वे अपने पास उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट, पानी की जांच से संबंधित दस्तावेज, शिकायत पत्र और अन्य साक्ष्य 28 फरवरी तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। तय समयसीमा के भीतर दस्तावेज जमा करना अनिवार्य बताया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया तथ्यों पर आधारित और पारदर्शी रह सके।
नगर निगम और विभागों पर उठे गंभीर सवाल
मौतों के दावों के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से पानी की खराब गुणवत्ता को लेकर शिकायत करते रहे थे। अब जांच से स्पष्ट होगा कि दूषित पानी की आपूर्ति कैसे हुई, क्या चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज किया गया और दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई बनती है।
रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की दिशा
आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही प्रशासनिक या आपराधिक कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसे इस पूरे मामले में सच्चाई उजागर करने का अहम माध्यम माना जा रहा है।
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