नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध का असर अब वैश्विक विमानन सेक्टर पर साफ दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलाइन कंपनियों की 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आव ने बताया कि हालात लगातार बदल रहे हैं और कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद या सीमित होने से उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है।
उड़ानों की संख्या में भारी गिरावट
पहले भारतीय एयरलाइंस पश्चिम एशिया के लिए रोजाना करीब 300 से 350 उड़ानें संचालित करती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 80 से 90 के बीच रह गई है। इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, कुवैत, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में हवाई पाबंदियों के कारण अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर बड़ा असर पड़ा है।
लंबे रूट से बढ़ा समय और खर्च
यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों को अब वैकल्पिक और लंबे मार्गों से गुजरना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ने के साथ-साथ एयरलाइंस की लागत भी बढ़ गई है, जिसका असर यात्रियों पर भी पड़ सकता है।
पायलट ड्यूटी नियमों में अस्थायी छूट
स्थिति को संभालने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों की ड्यूटी अवधि में अस्थायी राहत दी है। इसके तहत उड़ान समय सीमा को बढ़ाया गया है, ताकि बदले हुए रूट्स के कारण संचालन में आ रही दिक्कतों को कम किया जा सके। इस फैसले की भविष्य में समीक्षा भी की जाएगी।
ईंधन कीमतों में उछाल, सरकार की निगरानी
वैश्विक स्तर पर विमान ईंधन की कीमतों में तेजी आई है, हालांकि भारत में इसका सीमित प्रभाव ही देखने को मिला है। सरकार द्वारा एटीएफ की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि घरेलू किराए स्थिर बने रहें।
सप्लाई चेन बनाए रखने के प्रयास
युद्ध के बीच जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कुछ विदेशी एयरलाइंस को यात्री विमानों के जरिए कार्गो ढुलाई की विशेष अनुमति दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कठिन समय में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।