कोलकाता सहित पूरे पश्चिम बंगाल में अब गाय, बैल, भैंस और बछड़ों के वध पर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने “पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950” के कड़े पालन को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत बिना अनुमति और प्रमाण पत्र के पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार से अनुमति और प्रमाण पत्र अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार किसी भी पशु का वध तब तक नहीं किया जा सकेगा जब तक उसके लिए आधिकारिक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी न हो। यह प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करेगा कि पशु वध के लिए उपयुक्त है। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सख्त कार्रवाई और कानूनी प्रावधान
राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति पशु वध करने पर 6 महीने तक की कैद या 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
किन शर्तों का पालन अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत भैंस, बैल और बछड़े के वध के लिए विशेष प्रमाण पत्र जरूरी होगा।
वध से पहले नगरपालिका अध्यक्ष/पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक का संयुक्त प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है।
यदि प्रमाण पत्र देने से इनकार किया जाता है तो 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार में शिकायत दर्ज की जा सकती है।
पशु वध केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वधशालाओं में ही किया जाएगा।
सार्वजनिक स्थानों पर पूरी तरह रोक
सरकारी आदेश के अनुसार सड़क किनारे या किसी भी खुले स्थान पर पशु वध करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल निर्धारित वधशालाओं में ही यह प्रक्रिया की जा सकेगी। सभी उल्लंघन संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ
रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्देश राज्य प्रशासन की ओर से जारी किए गए हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों का उल्लेख है। इसमें संवैधानिक और न्यायालयीय अनुपालन को ध्यान में रखते हुए नियमों को और कड़ा किया गया है।