महिलाओं के अधिकारों और समानता की पेरवी करते हुए हर साल महिला दिवस मनाया जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को शिक्षा, करियर या किसी भीक्षेत्र में समान अवसर मिल सकें, इस बात को सुनिश्चित करते हुए 8 मार्च का दिन महिलाओं के नाम समर्पित कर दिया गया। इसी के साथ महिलाओं को उनके योगदान, परिवार व समाज में उनकी भूमिका के लिए सम्मानित करना भी महिला दिवस का उद्देश्य है।
भारतीय महिलाओं की स्थिति में पहले से काफी बदलाव आया है। पर्दे के पीछे रहने वाली महिलाएं अब शिक्षा और करियर को लेकर अग्रसर हो रही हैं। हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके जीवन से जुड़े फैसले आज भी वह खुद नहीं ले सकती हैं। अधिकतर महिलाएं अपने फैसलों के लिए परिवार या पति की अनुमति पर आश्रित होती हैं। वहीं कई महिलाओं को तो उनके अधिकारों के बारे में जानकारी ही नहीं होती। चाहें पिता का घर हो या पति का घर, दफ्तर हो या बच्चों का पालन पोषण , एक महिला को इन सभी जगहों का खास अधिकार मिलें हैं, जिसकी जानकारी न होने के कारण उनका जीवन अनुमति पर निर्भर रहता है।
संविधान में महिलाओं के लिए अधिकार
1. घरेलू हिंसा से सुरक्षा
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत, महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक शोषण से सुरक्षा मिलती है। महिलाएं पुलिस, महिला हेल्पलाइन या अदालत में शिकायत दर्ज कराकर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
2. समान वेतन का अधिकार
कामकाजी महिलाओं को दफ्तर में पुरुषों के समान काम के लिए बराबर वेतन मिलना चाहिए। समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के तहत महिलाओं को समान काम पर पुरुषों के समान वेतन पाने का अधिकार है। अगर किसी महिला को उसके पुरुष सहकर्मी की तुलना में कम वेतन दिया जाता है, तो वह न्याय के लिए श्रम अदालत में जा सकती है।
3. मातृत्व लाभ का अधिकार
मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत, कामकाजी महिलाओं को मां बनने की स्थिति में 6 महीने का मातृत्व अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है। इस दौरान कंपनीउनके वेतन में कोई कटौती नहीं कर सकती है और उन्हें नौकरी से भी निकाल नहीं सकती है। यह कानून महिलाओं को नौकरी में सुरक्षा और बच्चे की सही देखभाल का अवसर देता है।
4. संपत्ति का अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार, पिता की संपत्ति या पुश्तैनी संपत्ति पर बेटे या बेटी दोनों का समान अधिकार है। शादी के बाद भी महिला अपने माता-पिता की संपत्ति पर दावा कर सकती है।
5. यौन शोषण से सुरक्षा का अधिकार
कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अधिनियम के तहत अधिकार दिया गया है। हर कंपनी और संगठन में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना अनिवार्य है, जहां महिलाएं शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
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