प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के प्रसिद्ध पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ लंबी बातचीत की. इस पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने अपने बचपन के दिनों, पिता की चाय की दुकान पर बैठनें के अनुभव से लेकर संघ से जुड़ाव और सार्वजनिक जीवन के तमाम किस्सों पर बात की। इतना ही नहीं उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों से संबंध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के साथ ही चीन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है।
RSS को समझना आसान नहीं, इसके कामकाज को समझना होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेक्स फ्रीडमैन के साथ पॉडकास्ट में RSS से अपने जुड़ाव के बारे में भी बात की है। इसमें पीएम मोदी ने कहा कि मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने RSS जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जीवन का सार और मूल्य सीखा। मुझे उद्देश्यपूर्ण जीवन मिला। पीएम मोदी ने बताया कि बचपन में RSS की सभाओं में जाना हमेशा अच्छा लगता था। मेरे मन में हमेशा एक ही लक्ष्य रहता था, देश के काम आना। यही 'संघ' (RSS) ने मुझे सिखाया। आरएसएस इस साल 100 साल पूरे कर रहा है। आरएसएस से बड़ा कोई 'स्वयंसेवी संघ' दुनिया में नहीं है। आरएसएस को समझना आसान काम नहीं है, इसके कामकाज को समझना होगा। यह अपने सदस्यों को जीवन का उद्देश्य देता है। यह सिखाता है कि राष्ट्र ही सब कुछ है और समाज सेवा ही ईश्वर की सेवा है। हमारे वैदिक संतों और स्वामी विवेकानंद ने जो सिखाया है, पाकिस्तान से रिश्तों पर बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीन घंटे से अधिक के संवाद में कहा कि हम लगातार कह रहे हैं कि आप आतंकवाद के रास्ते को छोड़ दीजिए, ये सरकारी आतंकवाद है जो बंद होना चाहिए. सब कुछ आतंकवादियों के हाथ में छोड़ दिया है, इससे किसका भला होगा? उन्होंने कहा कि शांति के प्रयासों के लिए मैं खुद लाहौर चला गया था. मेरे प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने मेरे शपथ समारोह में पाकिस्तान को स्पेशल इन्वाइट किया था ताकि एक शुभ शुरुआत हो. लेकिन हर बार अच्छे प्रयासों का परिणाम नकारात्मक निकला. हम उम्मीद करते हैं कि उनको सद्बुद्धि मिलेगी. वहां की आवाम भी नहीं चाहती होगी कि ऐसी जिंदगी जिएं.
पीएम मोदी ने बताया इंडिया-PAK में किसकी क्रिकेट टीम बेहतर
पीएम मोदी ने कहा कि खेल पूरी दुनिया में ऊर्जा भरने का काम करते हैं, खेल भावना दुनिया को आपस में जोड़ने का काम करती है, तो मैं स्पोर्ट्स को बदनाम होते देखना नहीं चाहूंगा, मैं खेलों को मानव की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा समझता हूं. अगर बात की जाए कि कौन अच्छा और कौन बुरा है. तो खेल की टेक्निक के बारे में कहें तो मैं इसका एक्सपर्ट नहीं हूं. जो इसकी टेक्निक जानते हैं वही बता सकते हैं कि किसका खेल अच्छा है. लेकिन कुछ परिणाम से पता चलता है जैसे कुछ दिन पहले ही भारत-पाकिस्तान का मैच हुआ. जो परिणाम आया, उससे ही पता चला कि कौन सी टीम बेहतर है
गरीबी पर पीएम मोदी के विचार
अपने बचपन की कठिनाइयों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, जो व्यक्ति अच्छे जूते पहनने का आदी होता है, उसे उनकी अनुपस्थिति का एहसास होता है, लेकिन हमने कभी जूते पहने ही नहीं थे, तो हमें इसका महत्व पता नहीं था. यही हमारा जीवन था.
परिवार की मेहनत और अनुशासन
पीएम मोदी ने अपने माता-पिता की मेहनत और अनुशासन को याद करते हुए कहा, "हमारी मां ने बहुत मेहनत की. मेरे पिता भी बहुत अनुशासित थे. वह हर सुबह 4:00 या 4:30 बजे घर से निकलते थे, मंदिरों में जाते थे और फिर अपनी दुकान पर काम करने पहुंचते थे.
रूस-यूक्रेन के बीच समझौते के सवाल पर बोले PM मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जो भगवान बुद्ध की भूमि है. मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जो महात्मा गांधी की भूमि है. ये वे महान पुरुष हैं, जिनके उपदेश, जिनकी वाणी पूरी तरह से शांति को समर्पित हैं. और इसीलिए, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से हमारी पृष्ठभूमि इतनी मजबूत है कि जब भी हम शांति की बात करते हैं, तो दुनिया हमारी बात सुनती है. क्योंकि भारत गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की भूमि है. और हम संघर्ष के पक्ष में है ही नहीं. उन्होंने कहा कि हम सद्भाव का समर्थन करते हैं. न हम प्रकृति के खिलाफ संघर्ष चाहते हैं और न ही राष्ट्रों के बीच में संघर्ष चाहते हैं. हम समन्वय चाहने वाले लोग हैं. उसमें अगर हम कोई भूमिका अदा कर सकते हैं तो हमने निरंतर अदा करने का प्रयास किया है. मेरे रूस के साथ ही घनिष्ट संबंध हैं और यूक्रेन के साथ मेरे घनिष्ठ संबंध हैं. मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठकर कह सकता हूं कि यह युद्ध का समय नहीं है और मैं राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मित्रवत तरीके से कहता हूं कि भाई, दुनिया कितनी भी आपके साथ क्यों न खड़ी हो जाए, युद्ध के मैदान में कभी समाधान नहीं निकलेगा. समाधान तभी निकलेगा जब यूक्रेन और रूस दोनों बातचीत की मेज पर आएंगे.
चीन पर भारत-चीन को प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, टकराव नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति शी के साथ मेरी बैठक के बाद हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। हम 2020 से पहले के स्तर पर स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। विश्वास में समय लगेगा, लेकिन हम बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संघर्ष के बजाय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। 21वीं सदी एशिया की सदी है। भारत और चीन को स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, टकराव नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप का किया जिक्र
ह्यूस्टन में एक प्रोग्राम था हाउडी मोदी। मैं और राष्ट्रपति ट्रम्प दोनों वहां थे और स्टेडियम पूरा भरा हुआ था। अमेरिका में इतनी बड़ी भीड़ का इकट्ठा होना ही एक बहुत बड़ा मौका था। मैं भाषण दे रहा था। ट्रम्प नीचे बैठकर सुन रहे थे। यह उनका बड़प्पन है। अमेरिका का राष्ट्रपति स्टेडियम में भीड़ के बीच नीचे बैठकर सुन रहा है। मैं भाषण दे रहा हूं। मैं भाषण देने के बाद ट्र्म्प के पास गया और ऐसे ही उनसे कहा कि क्यों न हम दोनों एकसाथ इस स्टेडियम का एक चक्कर लगाएं। बहुत सारे लोग हैं यहां चलते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं। अमेरिकी जीवन में ये बात आपके लिए असंभव सी है कि राष्ट्रपति हजारों की भीड़ में चले। लेकिन ट्रम्प बिना एक पल भी इंतजार किए मेरे साथ चल पड़े। ट्रम्प के पास साहस है और वो अपने फैसले खुद लेते हैं।
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