राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। प्रदेश के 309 शहरी निकायों के 10,167 वार्डों के लिए दो चरणों में हुए चुनाव की मतगणना कल होगी। इसके साथ ही चुनाव मैदान में उतरे 38,889 उम्मीदवारों की हार-जीत का फैसला हो जाएगा।मतगणना के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश के अलग-अलग शहरी निकायों में किस राजनीतिक दल का बोर्ड बनने की स्थिति है।
सुबह 8 बजे शुरू होगी वोटों की गिनती
सभी संबंधित निकायों में वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही वार्डवार परिणाम सामने आने लगेंगे। दोपहर तक अधिकांश निकायों के नतीजे आने के बाद बोर्ड गठन को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।इन चुनाव परिणामों को राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि निकाय स्तर पर पार्षदों की संख्या ही आगे बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दो चरणों में हुई थी 74.05% वोटिंग
राजस्थान के शहरी निकायों में मतदान दो चरणों में कराया गया था। 9 सितंबर और 11 सितंबर को मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।पहले चरण में 162 शहरी निकायों में मतदान हुआ, जहां 76.41 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। वहीं दूसरे चरण में 147 निकायों में 71.69 प्रतिशत मतदान हुआ।दोनों चरणों को मिलाकर प्रदेश में कुल 74.05 प्रतिशत मतदान हुआ। अब इसी मतदान के नतीजे मतगणना के दौरान सामने आएंगे।
10,167 पार्षद चुने जाएंगे
इन चुनावों के जरिए राजस्थान के 309 शहरी निकायों के कुल 10,167 वार्डों में पार्षद चुने जाएंगे। हजारों उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के बाद अब मतगणना से तय होगा कि किस वार्ड में किस प्रत्याशी को जीत मिली।परिणाम आने के साथ ही स्थानीय निकायों में राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदलेंगे।
बोर्ड बनाने के लिए शुरू होगी जोड़-तोड़
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि किस दल को कितने निकायों में स्पष्ट बहुमत मिलता है। जिन निकायों में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलेगा, वहां बोर्ड बनाने के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कवायद शुरू हो सकती है।पार्षदों की संख्या के आधार पर मेयर, सभापति और चेयरमैन के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दल सक्रिय होंगे।
21 सितंबर को होगा मेयर और सभापति का चुनाव
निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अगला बड़ा चरण बोर्ड गठन का होगा। 21 सितंबर को मेयर, सभापति और नगरपालिका चेयरमैन के लिए वोटिंग होगी।इससे पहले राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में बहुमत जुटाने की कोशिश करेंगे। खासतौर पर त्रिशंकु स्थिति वाले निकायों में निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब नतीजों पर टिकी सभी की नजर
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में इस बार कुल 38,889 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा। मतगणना शुरू होने के साथ ही वार्डवार नतीजों का सिलसिला शुरू होगा और इसके बाद यह साफ होगा कि प्रदेश के 309 निकायों में किसका दबदबा कायम होता है।