सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित माना गया है, लेकिन ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवारों का महत्व अत्यंत विशेष होता है। इन्हें ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है और उत्तर भारत में यह पर्व गहरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान श्रीराम और हनुमान जी का प्रथम मिलन हुआ था। यही वह काल माना जाता है जब हनुमान जी ने लंका दहन कर अपनी अद्भुत शक्ति और भक्ति का परिचय दिया था। यही कारण है कि इस महीने के प्रत्येक मंगलवार को हनुमान कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
2026 में कब-कब पड़ेंगे बड़े मंगल
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह 2 मई से आरंभ होकर 29 जून तक रहेगा। इस दौरान आने वाले सभी मंगलवार बड़े मंगल के रूप में मनाए जाएंगे। पहला बड़ा मंगल 5 मई 2026 को पड़ रहा है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजन, भंडारे, हनुमान चालीसा पाठ और सुंदरकांड के आयोजन किए जाएंगे। मान्यता है कि बड़े मंगल पर किए गए दान, व्रत और जप का फल कई गुना बढ़ जाता है।
बड़े मंगल पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा
बड़े मंगल के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उनके साथ भगवान श्रीराम, माता सीता तथा लक्ष्मण जी का चित्र भी अवश्य रखें। इसके बाद दीपक जलाकर सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और तुलसी अर्पित करें। हनुमान जी को बूंदी, गुड़, चना और बेसन के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और राम नाम का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सुंदरकांड पाठ के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान
बड़े मंगल पर सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है तथा जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। वातावरण को शांत और पवित्र रखना आवश्यक माना गया है। पाठ के दौरान मन को स्थिर और श्रद्धा से पूर्ण रखना चाहिए तथा बीच में अनावश्यक बातचीत से बचना चाहिए। यदि संभव हो तो पाठ के आरंभ और अंत में श्रीराम तथा हनुमान जी की आरती अवश्य करें।
व्रत, दान और सेवा का भी है विशेष महत्व
बड़े मंगल के दिन व्रत रखने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। इस दिन शरबत, जल, फल और भोजन का दान करना पुण्यदायी माना गया है। कई स्थानों पर भक्तजन भंडारे आयोजित कर राहगीरों और गरीबों को प्रसाद वितरित करते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन सेवा और दान करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं।
संकटमोचन की भक्ति से मिलता है आत्मबल
हनुमान जी को शक्ति, साहस, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। बड़े मंगल पर उनकी उपासना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी माध्यम मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा व्यक्ति के मन में नई ऊर्जा और जीवन के प्रति आशावाद भर देती है। यही कारण है कि बड़ा मंगल आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण पर्व बना हुआ है।