धर्म डेस्क। गणेशोत्सव में घरों और पंडालों में विराजमान गणपति बप्पा को पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धापूर्वक विदा करने की परंपरा है। विसर्जन से पहले अंतिम पूजा की जाती है, जिसे कई परंपराओं में ‘उत्तरपूजा’ कहा जाता है। इसके बाद भक्त प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ पूजा सामग्री के उचित निस्तारण का ध्यान रखना भी जरूरी है। पर्यावरण संबंधी दिशानिर्देशों में प्रतिमा पर चढ़े फूल, पत्तियां, वस्त्र और सजावटी सामग्री को विसर्जन से पहले अलग करने की सलाह दी गई है। इन्हें प्रतिमा के साथ नदी या तालाब में डालने के बजाय अलग एकत्र करना चाहिए।
विसर्जन से पहले अलग कर लें फूल-माला और दूर्वा
प्रतिमा पर चढ़ाए गए फूल, मालाएं और दूर्वा विसर्जन से पहले सावधानी से हटा लें। केवल सूखे फूल ही नहीं, बल्कि अन्य चढ़ी हुई प्राकृतिक सामग्री भी अलग रखी जानी चाहिए। महाराष्ट्र की पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमा विसर्जन संबंधी नीति में फूल, पत्तियां और कृत्रिम आभूषण हटाने का स्पष्ट उल्लेख है।
कपड़े और कृत्रिम आभूषण पानी में न डालें
प्रतिमा को पहनाए गए अलग से हटाए जा सकने वाले वस्त्र, कृत्रिम मालाएं और सजावट भी निकाल लें। प्लास्टिक, थर्मोकोल या अन्य सजावटी सामान को जल में प्रवाहित न करें। दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामग्री संभालकर रखें और बाकी सामग्री स्थानीय निकाय की कचरा संग्रह व्यवस्था को सौंपें।
फूल और दूर्वा को इधर-उधर रखने के बजाय बनाएं खाद
पूजा में इस्तेमाल हुए फूल और दूर्वा को सड़क, नदी किनारे या किसी पेड़ के नीचे छोड़ देना उचित निस्तारण नहीं है। इन्हें अन्य कचरे से अलग एकत्र करें। जहां संभव हो, जैविक सामग्री की खाद बनाई जा सकती है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के दिशानिर्देश भी फूलों और अन्य जैविक पूजा सामग्री को अलग एकत्र करके कंपोस्ट बनाने की सलाह देते हैं।
सिंदूर और बची हुई पूजा सामग्री का क्या करें?
पूजा की थाली में बची सामग्री तथा उसके पैकेट और सजावटी सामान को पानी में न डालें। जैविक और गैर-जैविक सामग्री अलग रखें और स्थानीय संग्रह व्यवस्था के अनुसार उसका निस्तारण करें।
प्रतिमा पर लगे सिंदूर को रगड़कर हटाना सभी के लिए अनिवार्य है—ऐसा शास्त्रीय संदर्भ जाँचे गए स्रोतों में नहीं मिला। इससे जुड़े किसी विशेष अनुष्ठान के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पुरोहित से मार्गदर्शन लें।
क्या गणपति बप्पा को ‘खाली हाथ’ विदा नहीं करना चाहिए?
कुछ प्रचलित पूजा-विधियों में बप्पा की विदाई के समय फल, मोदक, सुपारी या अन्य सामग्री की पोटली रखने का उल्लेख मिलता है। इसे विदाई की धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है; सभी परिवारों के लिए एक जैसी सामग्री रखना अनिवार्य होने की पुष्टि नहीं मिली है।
भोग अर्पित करने और पूजा सामग्री को जल में प्रवाहित करने में अंतर है। विदाई की पूजा के बाद भी फूल और सजावट अलग एकत्र करें; पोटली सहित सारी सामग्री पानी में न डालें।
अंतिम पूजा और आरती के बाद करें बप्पा की विदाई
विसर्जन के दिन परिवार की परंपरा के अनुसार गणपति की अंतिम पूजा करें। भगवान को भोग अर्पित करके आरती की जाती है और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगी जाती है। भक्त परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हुए अगले वर्ष फिर आगमन का निमंत्रण देते हैं। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।
निर्धारित विसर्जन स्थल या कृत्रिम कुंड का करें इस्तेमाल
विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थल और कृत्रिम कुंड को प्राथमिकता दें। प्राकृतिक मिट्टी की छोटी प्रतिमा के लिए घर पर उपयुक्त पात्र में विसर्जन भी एक विकल्प है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के दिशानिर्देशों में घरेलू पात्र और अस्थायी कृत्रिम तालाबों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया है। अपने शहर की नवीनतम व्यवस्था का पालन करें।