कोलकाता डेस्क: शारदीय नवरात्रि 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। इस दौरान भक्त व्रत, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आरती के जरिए मां का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में हर देवी के स्वरूप को अलग-अलग शक्ति और गुणों से जोड़ा गया है।
11 अक्टूबर: मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और देवी पार्वती का एक स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। भक्त इस दिन मां की पूजा कर जीवन में मजबूती और नई शुरुआत का आशीर्वाद मांगते हैं। 11 अक्टूबर को ही घटस्थापना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा।

12 अक्टूबर: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। उनका स्वरूप तपस्या, साधना, धैर्य और संयम से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्तों को आत्मबल और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की शक्ति प्राप्त होती है।

13 अक्टूबर: मां चंद्रघंटा की पूजा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर सुशोभित अर्धचंद्र के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी के इस स्वरूप को साहस, शौर्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी पूजा से भय और नकारात्मकता से मुकाबला करने का आत्मविश्वास मिलता है।

14 अक्टूबर: मां कूष्मांडा की उपासना
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। नवदुर्गा में उन्हें चौथा स्वरूप माना गया है और उनका संबंध ऊर्जा, सृजन तथा प्रकाश से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की कृपा से घर-परिवार में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

15 अक्टूबर: मां स्कंदमाता की पूजा
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना होती है। उन्हें भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता के रूप में पूजा जाता है। देवी का यह स्वरूप मातृत्व, शांति और करुणा से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी पूजा से बुद्धि, शांति और संतान सुख की कामना की जाती है।

16 अक्टूबर: मां कात्यायनी की आराधना
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को विशेष रूप से विवाह और दांपत्य जीवन से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है।

17 अक्टूबर: मां कालरात्रि की पूजा
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वह भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा से भय पर विजय पाने, साहस बढ़ाने और संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

18 अक्टूबर: मां महागौरी की आराधना
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी के इस स्वरूप को शांति, पवित्रता और सौम्यता से जोड़ा जाता है। कई स्थानों पर अष्टमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि मां महागौरी की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

19 अक्टूबर: मां सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्रि के अंतिम यानी नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। उन्हें नवदुर्गा का नौवां स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने और विभिन्न प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन और विशेष हवन भी किया जाता है।

20 अक्टूबर को विजयादशमी
नौ दिनों की देवी आराधना के बाद 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस तरह शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से शुरू होकर विजयादशमी के साथ अपने अगले चरण में प्रवेश करेगी।