नई दिल्ली - भारत में महिला क्रिकेट अब सिर्फ एक खेल नहीं रहा, बल्कि यह एक तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बिजनेस बन चुका है। आने वाले विमेंस टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले यह साफ हो गया है कि महिला क्रिकेट ने देश में एक नई पहचान और मजबूत आर्थिक स्थिति बना ली है। इस टूर्नामेंट का पहला मैच इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा, जबकि भारत अपना पहला मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ 14 जून को खेलेगा। लेकिन चर्चा सिर्फ मैचों की नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के बढ़ते आर्थिक प्रभाव की भी है।
5,000 करोड़ का मजबूत बाजार
पिछले 3 से 4 वर्षों में भारत में महिला क्रिकेट का कमर्शियल मार्केट वैल्यू लगभग 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि अब यह खेल आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत बन चुका है। विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत ने इस ग्रोथ को और तेज कर दिया है। टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती व्यूअरशिप ने इसे एक बड़े मनोरंजन उद्योग के रूप में स्थापित कर दिया है।
कॉर्पोरेट निवेश और ब्रांड वैल्यू में उछाल
महिला क्रिकेटर्स पर अब बड़े कॉर्पोरेट घराने भारी निवेश कर रहे हैं। ब्रांड एंडोर्समेंट, विज्ञापन और लीग मैचों की लोकप्रियता ने खिलाड़ियों की कमाई में भी बड़ा इजाफा किया है। अब महिला खिलाड़ी भी पुरुष क्रिकेटर्स की तरह बड़े ब्रांड्स का चेहरा बन रही हैं। दुनियाभर में महिला क्रिकेट का कुल बाजार मूल्य 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है। इसमें भारत की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है। यह दर्शाता है कि भारत इस खेल के विकास में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन चुका है।
खेल से आगे एक ‘मेगा-बिजनेस’
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला क्रिकेट अब केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक पूरा आर्थिक इकोसिस्टम बन चुका है। इसमें मीडिया, ब्रांडिंग, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल कंटेंट सभी शामिल हैं। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे WPL और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की लोकप्रियता बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसका बाजार और बड़ा होता जाएगा। साफ है कि भारत में महिला क्रिकेट अब एक मजबूत और स्थायी ‘स्पोर्ट्स इंडस्ट्री’ के रूप में स्थापित हो चुका है।