कोलकाता डेस्क: फेस्टिव सीजन में स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर कई तरह के ऑफर्स और डिस्काउंट मिल रहे हैं। फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज और अमेजन की ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल में ग्राहक आकर्षक डील्स का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर आप 1,64,900 रुपये की कीमत वाला iPhone 18 Pro (256GB) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल डिस्काउंट देखकर पेमेंट का तरीका चुनना सही नहीं होगा। कई बार EMI और नो-कॉस्ट EMI जैसे विकल्प शुरुआत में सस्ते दिखाई देते हैं, लेकिन अतिरिक्त शुल्क जुड़ने के बाद कुल खर्च बढ़ जाता है। SaveSage के संस्थापक और सीईओ आशीष लाठ के अनुसार, खरीदारी के लिए वही पेमेंट ऑप्शन बेहतर है, जिससे फोन की अंतिम लागत सबसे कम हो। ऐसे में आइए समझते हैं कि फुल पेमेंट, क्रेडिट कार्ड EMI और नो-कॉस्ट EMI में से कौन सा विकल्प आपकी जेब के लिए फायदेमंद हो सकता है।
किस पेमेंट मोड में होगी सबसे ज्यादा बचत?
महंगा स्मार्टफोन खरीदते समय पेमेंट का सही तरीका चुनना बेहद जरूरी है। अगर आपके पास पर्याप्त सेविंग्स हैं और एक साथ बड़ी रकम खर्च करने से आपके जरूरी खर्च प्रभावित नहीं होते, तो क्रेडिट कार्ड से फुल पेमेंट करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इस तरीके में बैंक के ऑफर के अनुसार इंस्टेंट डिस्काउंट या कैशबैक का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, कार्ड की शर्तों के आधार पर रिवॉर्ड पॉइंट्स भी मिल सकते हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेजन पर iPhone 18 Pro (256GB) की खरीद के लिए फुल पेमेंट करने पर कुल खर्च लगभग 1,59,104 रुपये से 1,59,168 रुपये के बीच बताया गया है। वहीं, तीन महीने की सामान्य क्रेडिट कार्ड EMI पर कुल लागत 1,65,303.38 रुपये और नो-कॉस्ट EMI पर 1,66,498.15 रुपये बताई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि इन उदाहरणों में पूरा भुगतान करने पर सबसे ज्यादा बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कीमत और बचत बैंक, कार्ड, विक्रेता और उस समय लागू ऑफर्स की शर्तों पर निर्भर करेगी।
क्रेडिट कार्ड EMI में कितना बढ़ जाता है खर्च?
अगर आप एक साथ पूरी रकम नहीं देना चाहते, तो क्रेडिट कार्ड EMI का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें फोन की कीमत को तय अवधि की किश्तों में चुकाने की सुविधा मिलती है, जिससे एक बार में बजट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। हालांकि, सामान्य EMI में ब्याज और प्रोसेसिंग फीस जैसे अतिरिक्त खर्च जुड़ सकते हैं। दिए गए उदाहरण के अनुसार, तीन महीने की EMI पर SBI क्रेडिट कार्ड से 6,250 रुपये की छूट मिलने के बावजूद ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, ब्याज पर 18 प्रतिशत GST और अन्य शुल्कों को जोड़ने के बाद कुल लागत 1,65,303.38 रुपये हो जाती है। यानी शुरुआती डिस्काउंट के बावजूद ग्राहक को फुल पेमेंट की तुलना में अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। इसलिए EMI चुनने से पहले केवल मिलने वाली छूट पर ध्यान देने के बजाय सभी किश्तों और अतिरिक्त शुल्कों का हिसाब लगाना जरूरी है। अगर बैंक का इंस्टेंट डिस्काउंट ब्याज और अन्य शुल्कों से ज्यादा फायदा देता है, तभी सामान्य EMI आपके लिए बेहतर सौदा साबित हो सकती है।
क्या नो-कॉस्ट EMI सच में होती है फ्री?
नो-कॉस्ट EMI को अक्सर ऐसा विकल्प माना जाता है, जिसमें ग्राहक को कोई ब्याज नहीं देना पड़ता। यही वजह है कि महंगे स्मार्टफोन खरीदने वाले लोग इस सुविधा की ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस विकल्प में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता। आमतौर पर विक्रेता ब्याज के बराबर छूट देता है, जबकि बैंक की ओर से ब्याज की गणना और उससे जुड़े टैक्स लागू हो सकते हैं। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, ब्याज पर GST और अन्य शुल्क भी कुल कीमत में जुड़ सकते हैं। दिए गए उदाहरण में तीन महीने की नो-कॉस्ट EMI पर 299 रुपये की फीस, GST और अन्य शुल्कों के साथ कुल खर्च 1,66,498.15 रुपये बताया गया है। इस तरह नो-कॉस्ट EMI के नाम पर मिलने वाली सुविधा भी फुल पेमेंट के मुकाबले महंगी पड़ सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले EMI की शर्तें, कुल देय रकम और बैंक की ओर से लगाए जाने वाले सभी चार्ज जरूर जांचें।
आपके बजट के हिसाब से कौन सा विकल्प है बेहतर?
पेमेंट का सही विकल्प चुनने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति और खर्च करने की क्षमता को समझना जरूरी है। अगर आपके पास पर्याप्त पैसे हैं और पूरी रकम चुकाने के बाद भी आपकी बचत सुरक्षित रहती है, तो फुल पेमेंट करना फायदेमंद हो सकता है। इससे ब्याज और EMI से जुड़े अतिरिक्त खर्चों से बचने का मौका मिलता है। वहीं, अगर एक साथ लगभग 1.6 लाख रुपये खर्च करना आपके बजट के लिए मुश्किल है, तो नो-कॉस्ट EMI आपको भुगतान को छोटी-छोटी किश्तों में बांटने की सुविधा दे सकती है। हालांकि, इसमें भी प्रोसेसिंग फीस और टैक्स की जांच करना जरूरी है। सामान्य EMI का विकल्प तभी चुनना समझदारी होगी, जब मिलने वाला बैंक डिस्काउंट ब्याज और अन्य शुल्कों से ज्यादा हो। केवल ऑफर देखकर फैसला लेने के बजाय तीनों विकल्पों की अंतिम लागत की तुलना करें। ध्यान रखें कि फोन खरीदने के लिए अपनी इमरजेंसी सेविंग्स खत्म करना या जरूरत से ज्यादा कर्ज लेना सही फैसला नहीं होगा।
क्या EMI लेने से क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है असर?
क्रेडिट कार्ड से EMI बनवाने का असर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ सकता है। नो-कॉस्ट EMI और सामान्य EMI, दोनों में क्रेडिट कार्ड की उपलब्ध लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होने पर क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट 2 लाख रुपये है और आप 1.65 लाख रुपये की खरीदारी को EMI में बदलते हैं, तो इस्तेमाल की गई लिमिट लगभग 82.5 प्रतिशत होगी। क्रेडिट लिमिट का इतना बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करना कुछ समय के लिए आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि, स्कोर में गिरावट होना तय नहीं है, क्योंकि इसका असर आपकी पूरी क्रेडिट हिस्ट्री, बकाया रकम और भुगतान के व्यवहार पर भी निर्भर करता है। समय पर EMI चुकाना और भुगतान में देरी से बचना बेहद जरूरी है। इसलिए नया स्मार्टफोन खरीदने से पहले अपनी क्रेडिट लिमिट, मौजूदा बकाया और हर महीने की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखें।
फोन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
iPhone 18 Pro जैसे महंगे स्मार्टफोन की खरीदारी करते समय सबसे जरूरी है कि आप विज्ञापन में दिखाई गई कीमत के बजाय अंतिम भुगतान की रकम पर ध्यान दें। बैंक डिस्काउंट, कैशबैक, प्रोसेसिंग फीस, GST और ब्याज को जोड़कर ही असली बचत का पता लगाया जा सकता है। अगर आप क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर रहे हैं, तो यह भी जांच लें कि ऑफर आपके कार्ड पर लागू है या नहीं और कैशबैक तुरंत मिलेगा या बाद में। EMI के मामले में कुल देय रकम और हर महीने की किश्त की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। साथ ही, यह भी देखें कि EMI बनवाने के बाद आपकी क्रेडिट लिमिट कितनी बचती है। ध्यान दें कि यहां दिए गए आंकड़े अमेजन पर उपलब्ध ऑफर्स और शर्तों पर आधारित उदाहरण हैं, जिन्हें खरीदारी के समय दोबारा सत्यापित करना चाहिए। सही फैसला वही होगा, जो आपकी बचत को सुरक्षित रखते हुए फोन की कुल लागत को कम करे।