नई दिल्ली - प्रकृति की खूबसूरती और समय के साथ होने वाले बदलाव का एक बड़ा उदाहरण अब इतिहास बन गया है। अमेरिका के हवाई द्वीप पर स्थित मशहूर ‘होलेई सी आर्क’ ढहकर प्रशांत महासागर में समा गई है। करीब 550 साल पुरानी मानी जाने वाली यह प्राकृतिक संरचना पर्यटकों और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच बेहद लोकप्रिय थी। लगभग 90 फीट ऊंची इस चट्टानी मेहराब के टूटने से हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान के तटीय परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिकी नेशनल पार्क सर्विस (NPS) ने 1 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की।
23 सितंबर को मौजूद थी, चार दिन बाद गायब
होलेई सी आर्क हवाई के बिग आइलैंड पर स्थित हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान में चेन ऑफ क्रेटर्स रोड के अंतिम छोर पर मौजूद थी। यह समुद्र की ओर निकली हुई लावा चट्टानों से बनी एक विशाल मेहराब थी, जिसकी ऊंचाई लगभग 90 फीट थी।
NPS के अनुसार, 23 सितंबर 2026 को यह संरचना अपनी जगह पर खड़ी थी, लेकिन 27 सितंबर की रात तक ढह चुकी थी। इसके गिरने का सटीक समय पता नहीं चल पाया है। आशंका है कि ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो के दौरान समुद्र की तेज लहरों और मौसम के प्रभाव से यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
आखिर कैसे बनी थी इतनी विशाल चट्टानी मेहराब?
होलेई सी आर्क का निर्माण लगभग 550 साल पुराने लावा प्रवाह से जुड़ा था। ज्वालामुखी से निकला लावा ठंडा होकर चट्टान में बदल गया था। इसके बाद समुद्र की लहरों, हवा और प्राकृतिक कटाव ने धीरे-धीरे चट्टानों को आकार देना शुरू किया। समुद्र की लगातार टकराती लहरों से चट्टानों में दरारें और गुफाएं बनीं। समय के साथ इनका विस्तार हुआ और चट्टान का कुछ हिस्सा कटकर मेहराब के आकार में बदल गया। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से चलती रहती है और अंततः चट्टानी पुल कमजोर होकर गिर सकता है।
2018 के ज्वालामुखी विस्फोट से भी पहुंचा था नुकसान
होलेई सी आर्क के आसपास की चट्टानें लंबे समय से अस्थिर हो रही थीं। वर्ष 2018 में किलाऊआ ज्वालामुखी के विस्फोट और उसके शिखर के ढहने के दौरान आए भूकंपों ने आसपास की चट्टानों को नुकसान पहुंचाया था।
जनवरी 2020 में संरचना के पास नई दरारें और अस्थिरता दिखाई देने के बाद पार्क प्रशासन ने पुराने व्यूइंग एरिया को बंद कर दिया था। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए मार्च 2020 में कुछ दूरी पर नया सुरक्षित दर्शक स्थल बनाया गया। इसी साल ट्रॉपिकल स्टॉर्म डार्बी के दौरान उठी शक्तिशाली लहरों ने मेहराब के निचले हिस्से से चट्टान का एक बड़ा टुकड़ा तोड़ दिया था।
अब पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह
होलेई सी आर्क के ढहने के बाद राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने तट के अस्थिर किनारों से दूर रहने की अपील की है। समुद्र के पास मौजूद ऊंची चट्टानों के किनारे अचानक टूट सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
इस प्राकृतिक संरचना का अंत भले ही हो गया हो, लेकिन यह घटना याद दिलाती है कि समुद्र और ज्वालामुखीय गतिविधियां लगातार धरती के स्वरूप को बदलती रहती हैं। होलेई सी आर्क अब तस्वीरों और यादों में ही दिखाई देगी।