नई दिल्ली. भीषण गर्मी के इस दौर में जहां ठंडी चीजों की मांग अपने चरम पर है, वहीं उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगा है। आइसक्रीम, चॉकलेट और ठंडे पेय पदार्थों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस वृद्धि के पीछे वैश्विक स्तर पर बिगड़ती आपूर्ति व्यवस्था और बढ़ती लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव का सीधा असर
पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। समुद्री मार्गों में बाधा और परिवहन लागत में वृद्धि ने आयातित कच्चे माल की कीमतों को बढ़ा दिया है। इसका असर अब रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं तक पहुंच गया है, जिससे बाजार में महंगाई का दबाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल और पैकेजिंग लागत में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री पर पड़ा है, जो खाद्य उत्पादों के लिए आवश्यक होती है। पैकेजिंग महंगी होने से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिसे संतुलित करने के लिए उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। यह स्थिति विशेष रूप से आइसक्रीम और पेय पदार्थों के क्षेत्र में अधिक प्रभावी रूप से देखने को मिल रही है।
सूखे मेवों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
चॉकलेट और आइसक्रीम में उपयोग होने वाले सूखे मेवों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। व्यापारियों के अनुसार पिछले दो महीनों में इनकी कीमतों में 20 से 22 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। समुद्री परिवहन महंगा होने और बीमा लागत बढ़ने के कारण आयातित उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे बाजार में इनके दाम बढ़ गए हैं।
कंपनियों ने बढ़ाए उत्पादों के दाम
बढ़ती लागत के चलते प्रमुख कंपनियों ने भी अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया है। नेचुरल्स आइसक्रीम ने अपने कई उत्पादों के दाम लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं, जबकि मदर डेयरी ने भी कुछ आइसक्रीम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की है। कंपनियों का कहना है कि गुणवत्ता बनाए रखने और लागत संतुलन के लिए यह कदम आवश्यक हो गया है।
कोको और हेजलनट की बढ़ती लागत
चॉकलेट निर्माण में उपयोग होने वाले कोको और हेजलनट जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है। हेजलनट की कीमतों में सालाना आधार पर 75 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। तुर्की जैसे प्रमुख आपूर्ति देशों से आयात प्रभावित होने के कारण अब हवाई मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत और अधिक बढ़ गई है।
पेय पदार्थों की आपूर्ति पर भी असर
इंस्टेंट ड्रिंक्स के क्षेत्र में भी आपूर्ति प्रभावित हुई है। लोकप्रिय ब्रांड रसना की बाजार में उपलब्धता कम हो गई है। पैकेजिंग के लिए आवश्यक कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है।
उपभोक्ताओं के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति
इस पूरे परिदृश्य ने उपभोक्ताओं के सामने एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, जहां गर्मी से राहत पाने के लिए जरूरी उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो आने वाले समय में इन उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखी जा सकती है।