भोपाल. 11 अक्टूबर से माता के नौ दिन यानी नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। ये नौ दिन पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं। कहीं इसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है तो कहीं दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना होती है। इस मौके पर एक भजन बड़ा ही खास रहता है क्योंकि दुर्गा मां के पंडाल में सुबह-सुबह इसे जरूर ही बजाया जाता है। इसमें बात ही सुबह सवेरे मां के दरबार को सजाने और ज्योति जलाने की हो रही है। ऐसे में यह भजन और खास हो जाता है। हम बात कर रहे हैं अम्बे मां के भजन भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे की। इस भजन के बोल बलबीर निर्दोष ने लिखे थे और इसे नरेंद्र चंचल ने अपनी आवाज से अमर बना दिया।
नरेंद्र चंचल की जादुई आवाज
नरेंद्र चंचल भक्ति गीत गाने के लिए जाने जाते थे लेकिन उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए भी गीत गाए। वे कई आइकॉनिक भजन गाने के लिए जाने जाते हैं। नरेंद्र चंचल के चर्चित भक्ति गीतों की बात करें तो इनमें चलो बुलावा आया है तूने मुझे बुलाया शेरावालिए अम्बे तू है जगदम्बे काली संकट मोचन नाम तिहारो राम से बड़ा राम का नाम शामिल है। भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे उनकी आवाज में इतना लोकप्रिय हुआ कि यूट्यूब पर 16 साल पहले टिप्स के चैनल पर शेयर किए जाने के बाद से इसे 292 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। नवरात्रि में इस भजन के बिना मां का दरबार अधूरा लगता है।
जन्म और संगीत यात्रा
नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर 1940 को पंजाबी हिंदू फैमिली में हुआ। पारिवारिक माहौल भक्ति भाव से भरा था इसलिए उन्हें भजन और आरती गाने की प्रेरणा मिली। लंबे संघर्ष के बाद साल 1973 में उन्हें फिल्म बॉबी में बेशक मंदिर मस्जिद गाने को मिला। उन्होंने भक्ति संगीत की दुनिया में बड़ा नाम कमाया। नरेंद्र चंचल हर साल 29 दिसंबर को वैष्णो देवी मंदिर जाया करते थे और साल के आखिरी दिन वहां परफॉर्म करते थे। इस लीजेंड्री भजन सिंगर ने साल 2021 में 22 जनवरी को 80 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा। उनका निधन उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते हुआ।
अमर विरासत और लोकप्रियता
आज नरेंद्र चंचल हमारे बीच नहीं हैं लेकिन शायद ही दुर्गा मां का कोई ऐसा पंडाल हो जहां उनकी आवाज में भजन न बजें। भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे जैसे भजन उनकी आवाज को अमर बना चुके हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह के समय यह भजन पूरे देश के पंडालों में गूंजता है। भक्तों की आस्था और नरेंद्र चंचल की भावपूर्ण आवाज का मेल इसे सदाबहार बनाता है। यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी गायकी समय की सीमाओं से परे है। भक्ति संगीत के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।
नवरात्रि में भजन की प्रासंगिकता
नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही यह भजन फिर से चर्चा में आ जाता है। मां के दरबार को सजाने और सुबह की ज्योति जलाने का भाव भक्तों को श्रद्धा से भर देता है। नरेंद्र चंचल की आवाज में गाया गया यह भजन पीढ़ियों को जोड़ता है। पुरानी यादों को ताजा करने के साथ नई पीढ़ी भी इसे उतनी ही श्रद्धा से सुनती है। भक्ति संगीत के इस अमर गायक की विरासत नवरात्रि के हर पंडाल में जीवित रहती है। भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे आज भी मां की भक्ति का प्रतीक बना हुआ है।