लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग और प्रशासन ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। कानपुर में सितंबर के पहले सप्ताह से ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC शुरू होने जा रही है। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी और पुराने चुनावी डेटा को हटाया जाएगा। इसके साथ ही चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती और मतदाता जागरूकता अभियान पर भी जोर दिया जा रहा है। FLC के बाद छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाने की प्रक्रिया को देखते हुए जनवरी 2027 में आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव की तारीख और कार्यक्रम की अंतिम घोषणा निर्वाचन आयोग ही करेगा।
सितंबर में EVM की होगी फर्स्ट लेवल चेकिंग
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को चुनाव के लिए तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानपुर में सितंबर के पहले सप्ताह से ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC शुरू होने वाली है। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी रहेगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सके। जांच के दौरान मशीनों में दर्ज पिछले चुनावों के डेटा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया जाएगा। इसके बाद ईवीएम और वीवीपैट की तकनीकी स्थिति की जांच होगी। मशीनों की कार्यक्षमता को परखा जाएगा और किसी तरह की तकनीकी कमी मिलने पर उसे दूर किया जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान मशीनों से जुड़ी किसी भी परेशानी की संभावना को कम करना है।
कानपुर में हजारों EVM सुरक्षित
कानपुर जिले में चुनाव के लिए बड़ी संख्या में ईवीएम और वीवीपैट मशीनें सुरक्षित रखी गई हैं। इनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL के M-3 मॉडल की 6,613 बैलेट यूनिट शामिल हैं। इसके अलावा जिले में 5,661 कंट्रोल यूनिट और 5,719 वीवीपैट मशीनें भी सुरक्षित हैं। FLC के दौरान इन सभी मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी। अधिकारियों की ओर से मशीनों की कार्यक्षमता और तकनीकी स्थिति को भी परखा जाएगा। जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के समय इस्तेमाल होने वाली मशीनें पूरी तरह से दुरुस्त रहें। बड़ी संख्या में मशीनों की जांच के कारण प्रशासन ने इसकी तैयारियां पहले से शुरू कर दी हैं।
FLC के बाद छह महीने में चुनाव की तैयारी
ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग पूरी होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक तैयारियां और तेज होने की उम्मीद है। दी गई जानकारी के अनुसार, FLC पूरी होने के बाद छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाने की प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाता है। इसी वजह से जनवरी 2027 में आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह अभी संभावित समय-सीमा है और इसे चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। चुनाव की तारीख, चरण और आचार संहिता लागू होने का अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग करेगा। प्रशासन फिलहाल संभावित चुनाव कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां पूरी करने में जुटा है।
किदवई नगर और कल्याणपुर में RO की तैनाती बाकी
चुनाव आयोग ने विधानसभा स्तर पर चुनावी जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी सख्ती दिखाई है। आयोग ने सभी रिक्त रिटर्निंग ऑफिसर यानी RO और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर यानी ARO के पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। कानपुर के किदवई नगर और कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्रों में अभी RO की तैनाती नहीं हुई है। आयोग ने इन दोनों क्षेत्रों में इसी सप्ताह अधिकारियों की तैनाती करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तैनाती से जुड़ी सूची आयोग को उपलब्ध कराने को कहा गया है। चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन पदों पर नियुक्ति को अहम माना जा रहा है।
RO और ARO की भूमिका क्यों है अहम?
चुनाव प्रक्रिया में रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। नामांकन प्रक्रिया से लेकर चुनाव से जुड़े कई अहम कार्यों की निगरानी इन्हीं अधिकारियों के स्तर पर की जाती है। उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की प्रक्रिया, चुनाव संबंधी व्यवस्थाएं और कई प्रशासनिक कार्य RO की देखरेख में होते हैं। वहीं ARO, RO की चुनावी प्रक्रिया को पूरा कराने में सहायता करते हैं। ऐसे में चुनाव की घोषणा से पहले ही इन पदों पर अधिकारियों की तैनाती जरूरी मानी जाती है। आयोग चाहता है कि चुनावी कार्यक्रम शुरू होने से पहले सभी विधानसभा क्षेत्रों में जिम्मेदार अधिकारियों की व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहे।
मतदाता जागरूकता अभियान पर भी फोकस
निर्वाचन आयोग की तैयारियां केवल ईवीएम और अधिकारियों की तैनाती तक सीमित नहीं हैं। मतदाताओं को जागरूक करने के लिए स्वीप यानी Systematic Voters’ Education and Electoral Participation अभियान को भी तेज किया जा रहा है। इसके तहत मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और चुनाव से जुड़ी जरूरी जानकारियों के बारे में जागरूक किया जाएगा। आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से चार-चार सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए बुलाया है। 24 अगस्त को इन प्रतिनिधियों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान मतदाता जागरूकता से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य चुनाव से पहले अधिक से अधिक मतदाताओं तक सही और जरूरी जानकारी पहुंचाना है।
25 अगस्त को 35 BLO की लखनऊ में ट्रेनिंग
मतदाता जागरूकता अभियान के साथ बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 25 अगस्त को कानपुर जिले के 35 बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO को लखनऊ में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया है। प्रशिक्षण में उन्हें प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही मतदाता जागरूकता से जुड़े कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करने पर भी जोर रहेगा। BLO चुनावी प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए चुनाव से पहले उन्हें जरूरी प्रशिक्षण देना प्रशासन की तैयारियों का अहम हिस्सा है। आयोग की कोशिश है कि ईवीएम जांच, अधिकारियों की तैनाती और मतदाता जागरूकता तीनों मोर्चों पर समय रहते तैयारी पूरी कर ली जाए।
जनवरी 2027 में आचार संहिता लागू होने की संभावना
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। सितंबर में ईवीएम की FLC, अधिकारियों की तैनाती और मतदाता जागरूकता अभियान जैसी तैयारियां इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। FLC के बाद छह महीने की समय-सीमा को देखते हुए जनवरी 2027 में आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना प्रशासनिक स्तर पर जताई जा रही है। हालांकि, अभी चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। आचार संहिता कब लागू होगी और मतदान किन चरणों में कराया जाएगा, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा। फिलहाल आयोग की तैयारियों से साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया धीरे-धीरे गति पकड़ रही है।