लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर की प्रक्रिया तेज हो गई है। ऐसे में मतदाता सूची से दूसरे का नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरते समय लोगों को सही जानकारी देने और घोषणा करने के निर्देश दिए गए हैं। आपत्तियों की जांच के दौरान मिथ्या घोषणा पत्र पाए जाने पर एक साल की सजा और जुर्माना या फिर दोनों किए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं। मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
मिथ्या घोषणा पर कानूनी प्रावधान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा-31 के तहत मतदाता सूची की तैयारी पुनरीक्षण व शुद्धि या किसी प्रविष्टि को मतदाता सूची में शामिल करने या हटाने के संबंध में जानबूझकर मिथ्या कथन या घोषणा लिखित रूप से करना दंडनीय अपराध है। दोषी व्यक्ति को एक वर्ष तक की सजा व जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है। फॉर्म-7 में भी आवेदक से इस संबंध में निर्धारित घोषणा प्राप्त की जाती है। अगर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जांच में यह पाता है कि फॉर्म-7 के माध्यम से की गई आपत्ति झूठी है तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कानून का उल्लंघन करने वालों को सजा का सामना करना पड़ सकता है।
जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलों में इसका अधिक से अधिक प्रचार किए जाने के निर्देश दिए। लोगों को सही जानकारी देने के लिए जागरूक किया जा रहा है। फॉर्म-7 भरते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। झूठी आपत्ति दर्ज कराने से बचने के लिए प्रचार सामग्री तैयार की जा रही है। जिला स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय किया गया है। मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। गलत जानकारी फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है।
फॉर्म-7 में घोषणा अनिवार्य
फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराई जाती है। इसमें आवेदक को निर्धारित घोषणा करनी होती है कि दी गई जानकारी सही है। जांच के दौरान यदि घोषणा झूठी पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी इस जांच के लिए जिम्मेदार हैं। सही तथ्यों के आधार पर ही आपत्ति स्वीकार की जाएगी। गलत मंशा से भरे गए फॉर्म पर सख्ती बरती जाएगी। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल सही जानकारी के साथ ही आवेदन करें। प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
एसएसआर की समय सीमा
एसएसआर के तहत दो नवंबर तक पोलिंग बूथों का संभाजन होगा। 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां की जा सकेंगी। 28 दिसंबर तक दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होगी। इस समय सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। दावे और आपत्तियों के निपटारे में पारदर्शिता रखी जाएगी। मतदाताओं को निर्धारित अवधि में ही आवेदन करने की सलाह दी गई है। समय पर प्रक्रिया पूरी होने से चुनाव की तैयारी सुचारू रहेगी।
जागरूकता अभियान पर जोर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलों में अधिक से अधिक प्रचार किए जाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को फॉर्म-7 भरते समय सही जानकारी देने के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। झूठी घोषणा के कानूनी परिणामों की जानकारी प्रसारित की जा रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता सामग्री पहुंचाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय स्तर पर शिविर और बैठकें आयोजित करें। मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने में जनसहभागिता जरूरी है। गलत जानकारी देने से न केवल कानूनी कार्रवाई होगी बल्कि सूची की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।
मतदाता सूची की शुद्धता का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को स्वच्छ और सटीक बनाना है। झूठी आपत्तियों पर सख्ती से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग और राज्य प्रशासन मिलकर प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। अंतिम सूची जारी होने तक सभी चरणों में पारदर्शिता रखी जाएगी। मतदाताओं से अपील है कि वे सही जानकारी के साथ सहयोग करें। शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाती है।