कोलकाता: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूजा पंडालों में लोगों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर VIP प्रवेश द्वारों को भी हटाया जा सकता है। इसके साथ ही चोरबागान हादसे की जांच के लिए गठित की जाने वाली टीम से कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम को बाहर रखने की बात सामने आई है, क्योंकि इन दोनों की भूमिका पर भी कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठे हैं।
VIP गेट हटाने पर विचार, आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि
रविवार को भवानी भवन में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भीड़ प्रबंधन को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। चोरबागान हादसे के बाद बड़े पूजा पंडालों में VIP प्रवेश की व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे अलग प्रवेश द्वारों को हटाने का फैसला भी लिया जा सकता है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पंडालों में प्रवेश और निकास के रास्ते सुरक्षित हों और अधिक भीड़ होने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।
जांच टीम से कोलकाता पुलिस और नगर निगम बाहर
चोरबागान हादसे की जांच को लेकर भी अहम फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक, घटना की पड़ताल के लिए बनाई जाने वाली जांच टीम में कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम को शामिल नहीं किया जाएगा। इसकी वजह यह है कि हादसे के बाद इन दोनों संस्थाओं की भूमिका और संभावित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में जांच के दौरान जिम्मेदारियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल किए जाने की जरूरत है। हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि पुलिस अपनी अलग जांच नहीं करेगी। कोलकाता पुलिस घटना के कारणों और कथित लापरवाही की पड़ताल कर रही है।
बारिश के बीच उमड़ी भीड़, कैसे हुआ हादसा?
उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम महाष्टमी नहीं, बल्कि महासप्तमी के दौरान यह दर्दनाक घटना हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, अचानक हुई बारिश के बीच पंडाल में लोगों की भीड़ बढ़ गई। संकरे रास्ते, प्रवेश और निकास के दौरान पैदा हुई अव्यवस्था तथा भीड़ को नियंत्रित करने में कथित चूक के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत की खबर सामने आई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
सुरक्षा व्यवस्था में चूक के आरोप, जांच जारी
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस की तैनाती को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की तैनाती VIP प्रवेश द्वार के आसपास अधिक थी, जबकि दूसरे हिस्सों में भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। पुलिस अधिकारियों ने भी शुरुआती जांच में भीड़ प्रबंधन की कमी और कथित तौर पर भ्रामक घोषणाओं को संभावित कारणों में शामिल किया है। फिलहाल, इन आरोपों की जांच की जा रही है और किसी एक कारण को हादसे के लिए अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
पूजा आयोजकों को सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने का संदेश
चोरबागान की घटना ने दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पंडालों में भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में आयोजकों को प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था, पर्याप्त स्वयंसेवकों की तैनाती, आपातकालीन निकासी और भीड़ बढ़ने की स्थिति में प्रवेश रोकने जैसे उपायों पर ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री का संदेश है कि पूजा की भव्यता और थीम से ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की जान और सुरक्षा है। आने वाले दिनों में पंडालों की व्यवस्था की समीक्षा और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर नजर रहेगी।