गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था और सबसे पहले वे हरिद्वार में प्रकट हुई थीं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में गंगा स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
राजा भगीरथ का कठोर तप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा ने राजा भगीरथ के कठोर तप से प्रसन्न होकर धरती पर अवतरण किया था और उनके पूर्वजों का उद्धार किया था। इसी कारण गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन गंगा स्नान करने से 10 प्रकार के पापों—3 कायिक 4 वाचिक और 3 मानसिक—से मुक्ति मिलती है।
इस अवसर पर गंगा स्नान के साथ दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन जल अन्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
जिला प्रशासन ने सुरक्षा के किए पुख्ता इंतजाम
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र को 2 सुपर जोन 11 जोन और 27 सेक्टर में विभाजित किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और स्नान पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
हरिद्वार में आस्था श्रद्धा और भक्ति का यह अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है जहां लाखों श्रद्धालु गंगा मैया के जयकारों के साथ पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।