शिमला: उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में तीन दिन की छुट्टी के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। नैनीताल, कैंची धाम, मसूरी से लेकर शिमला और मनाली तक सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। बढ़ती भीड़ के चलते होटल, होमस्टे और पार्किंग तक फुल हो गए हैं, जिससे सैलानियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नैनीताल में होटल फुल, सड़क और बस स्टैंड पर गुजरी रात
नैनीताल में गांधी जयंती के आसपास मिले लंबे वीकेंड का असर साफ दिखाई दिया। बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ों की ओर पहुंचे, जिसके बाद शहर के ज्यादातर होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट पूरी तरह भर गए। बिना एडवांस बुकिंग पहुंचे कई पर्यटकों को देर रात तक ठहरने की जगह नहीं मिली। कुछ पर्यटक मजबूरी में बस स्टैंड, रिक्शा स्टैंड और बंद दुकानों के बाहर रात गुजारते नजर आए।
रिपोर्टों के मुताबिक, नैनीताल में करीब 700 होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट हैं, लेकिन भारी भीड़ के कारण इनमें अधिकांश की बुकिंग फुल हो गई। कमरे की मांग बढ़ने के साथ किराए में भी बड़ा उछाल देखने को मिला। कुछ जगहों पर सामान्य दिनों में 2 से 3 हजार रुपये में मिलने वाले कमरों के लिए करीब 12 हजार रुपये तक मांगे जाने की बात सामने आई है।
नैनीताल के रास्तों पर कई किलोमीटर तक जाम
शनिवार को पर्यटकों की संख्या और बढ़ने के बाद रूसी बाईपास, भूमियाधार और नारायण नगर समेत कई रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। काठगोदाम से आगे ज्योलीकोट और भीमताल रोड पर भी वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया। रिपोर्टों में एक दिन में करीब 15 हजार पर्यटकों के नैनीताल पहुंचने का उल्लेख है।
होटल में बुकिंग नहीं कराने वाले पर्यटकों को कुछ स्थानों से वापस भी भेजा गया। वहीं, रूसी बाईपास से नैनीताल के बीच चलने वाली शटल सेवाओं में भी भीड़ का दबाव बढ़ा और यात्रियों से अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आईं।
कैंची धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब, हाईवे पर थमे वाहनों के पहिए
नैनीताल के साथ कैंची धाम में भी भारी भीड़ ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। बाबा नीब करौरी महाराज के आश्रम में शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के आसपास और हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी।
जाम में फंसे यात्रियों और पर्यटकों को घंटों अपने वाहनों में इंतजार करना पड़ा। कई लोग भूखे-प्यासे ही जाम खुलने का इंतजार करते रहे। बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को भी काफी परेशानी हुई। स्थिति से नाराज लोगों ने यातायात प्रबंधन को लेकर पुलिस-प्रशासन पर सवाल भी उठाए।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार शनिवार को कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या 35 हजार से अधिक पहुंच गई थी, जबकि अन्य रिपोर्टों में इससे भी ज्यादा भीड़ का उल्लेख है। भारी संख्या में लोगों के पहुंचने से मंदिर क्षेत्र के साथ आसपास के हाईवे पर भी दबाव बढ़ गया।
मसूरी और चारधाम मार्ग भी जाम से प्रभावित
पर्यटकों की भीड़ का असर सिर्फ नैनीताल और कैंची धाम तक सीमित नहीं रहा। मसूरी में भी प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगीं। वहीं, उत्तराखंड के कई चारधाम यात्रा मार्गों पर भी यातायात प्रभावित रहा। बद्रीनाथ मार्ग पर लंबा जाम लगने की खबर सामने आई, जबकि केदारनाथ यात्रा रूट पर भी वाहनों की आवाजाही धीमी रही।
शिमला-मनाली में भी पर्यटकों का सैलाब
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र शिमला और मनाली भी इस लंबे वीकेंड पर सैलानियों से भर गए। शिमला में होटल ऑक्यूपेंसी करीब 100 प्रतिशत तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। शहर की सड़कों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहा और कई जगह पर्यटक घंटों जाम में फंसे रहे।
मनाली, कुल्लू, कसोल और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। कुल्लू जिले में दो दिनों के भीतर एक लाख से अधिक पर्यटकों के पहुंचने और 11 हजार से ज्यादा टूरिस्ट वाहनों की एंट्री का उल्लेख किया गया है। मनाली में भी होटल और होमस्टे की ऑक्यूपेंसी काफी ऊंची रही।
जाम ने बढ़ाई परेशानी, पर्यटन कारोबार को मिला फायदा
पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की इस भारी भीड़ ने जहां सैलानियों की मुश्किलें बढ़ा दीं, वहीं होटल, होमस्टे, रेस्तरां और टैक्सी कारोबार से जुड़े लोगों को इसका फायदा मिला। हालांकि, भारी ट्रैफिक ने स्थानीय लोगों की आवाजाही भी प्रभावित की और कई जगह प्रशासन के लिए यातायात संभालना चुनौती बन गया।
कुल मिलाकर, लंबे वीकेंड पर पहाड़ों में उमड़ी भीड़ ने पर्यटन कारोबार को रफ्तार तो दी, लेकिन नैनीताल से लेकर कैंची धाम और शिमला-मनाली तक ट्रैफिक और ठहरने की व्यवस्था की चुनौतियां भी सामने ला दीं।